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Showing posts from 2019

राष्ट्रहित सर्वोपरि

विश्वगुरू कहलवाते थे कल तक, आज बेवकूफ नजर आते हैं, बिना सोच समझ कर हम भी देखो, भेड़ चाल सी चलते जाते हैं। कुछ असामाजिक मिश्रण मिल गये, और हम भी उसमे घुलने लगे, सालों की अहिंसक परंपरा छोड़, हिसंक न जाने क्यों हम होने लगे। खुद पर अब बिस्वाश नहीं है, दूजे की बुद्धि से सोचने लगे, सवाल पूछते फिर रहें हैं, पर सवाल खुद नही हम समझ रहे, मैंने भी खुद से एक सवाल किया, तुम्हें भी समझ आये तो बतलाना, खुद के होने की मुझे खबर नहीं, तो क्या ठीक नही है मर जाना।। राह तो मुश्किल होगी ही, सच की राह जो चुन ली है, राक्षस उपद्रव करेंगे ही, यज्ञ की अगर तुमने ठानी है। फिर भी तुम निडर बढ़े चलो, झूठ से प्रदा उठने वाला है, कुछ संहार होने जरूरी है, अगर रामराज तुम्हे लाना है।। चंद जयचंदों के होने से, देश की आभा मिट सकती नहीं, देशविरोधी नारों से अब, देशभक्तों की गिनती घटती नही। मिलजुल कर हम साथ हैं सब, बस थोड़ा संयम रखना बाकी है, भूत पिचास सब भागेंगे अब, पंचजन्य की हुंकार आनी बाकी है। मेरा प्रयास है तुन्हें जगाना, तथ्यों संग सच को दिखलाना, पहले जानो, बूझो, फिर तोलो, तब जाकर तुम निर्णय करलो। सही दिश...

जीवन वर्दी का

न कोई फिक्र न कोई चिंता मन मे मेंरे घर करती, मेरी रक्षा में हर पल एक वर्दी जो तत्पर है रहती। बड़े सुकूँ से जीवन जीते दिन रात की हर पहर में, मेरी रक्षा में खड़ी है सोच, हर वक्त एक वर्दी शहर में।। बेफिक्र निकलता हूँ घर से, निशदिन निडर होकर जब भी, वजह तुम ही हो सच कहता हूँ, होता नहीं मुझे डर कभी। रहते हो अटल खड़े तुम, कड़ी धूप, वर्षा या फिर हो सर्दी, आसान इसे तुम मत आँकना, यूहीं पहन लो जो तुम वर्दी।। अनन्य संकट हो चाहे या कोई कष्ट तुम्हें घर कर जाये, सीना ताने फिर भी आगे आये वही तो हो तुम वर्दी वाले। निज स्वार्थ से पहले, निस्वार्थ सेवा का मन भाव जो रखते हैं, वही मानव तो निश्छल होकर सेवा मे वर्दी पहनते है।। ऐसा जीवन ऐसी मंशा प्रत्येक मानव में अगर घर कर जाये, जन जन में खुशहाली और देश स्वतः खुशहाल हो जाये। मेरी भी एक कोशिश होगी, सर्वजन हिताय सोच रखूँ, नमन करूँ इस वर्दी को, जीवन मे सब को मुस्कान दे पाऊँ।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

हम तुम फिर से

यूहीं आज बैठा था जो मैं तन्हा फिर से, चली आयी तेरी यादों की वो लहर फिर से। ठहर ठहर फिर हिचकियों का सिलसिला शुरू हुआ, जैसे याद हो किया तुमने और मैं मुस्कुरा फिर दिया।। क्यूँ न जाने आज भी तेरी खुशबू जहन में बाकी है, तुम पास न सही लेकिन यादों की सिहन बाकी है। वक्त बेवक्त छलक ही जाते हैं नीर आँखों से अक्सर, तेरी बिछड़न की वो रात अभी भी बाकी है।। कोई किस्सा न बना और न ही कोई कहानी लिख पाया, फिर भी तुम्हें वर्षों बाद भी दिल से न निकाल पाया। न जाने कैसा रिश्ता था जो लाख चाहकर भी नहीं टूटता, कहीँ भी रहूँ यारा लेकिन तेरी यादों का कारवाँ नही छूटता।। मन में कोई ख्वाइश उठती है आज भी अगर कभी, शुरुआत फिर तेरी चाहत से होती है फिर सभी। माना कि मुकम्मल नहीं होती है चाहतें जहां में अक्सर, देखो नादान दिल तुम्हें ही मांगे ख्वाइश में एक बार फिर।। मेरी हर कोशिश हर वक्त बेबुनियाद ही साबित होती रही, जब जब तुझसे दूर जाने की मैंने चाह मन मे भरी। शायद ये बँधन तुमसे कई कई जन्मों से चलता आ रहा होगा, इसलिए हर बार मेरे जीवन का हिस्सा तुम्हें बना रहा होगा।। Pari ©   ® Par...

उठाओ तलवार फिर रानी लक्ष्मीबाई

कैसे चुप हम रह सकते हैं, कैसे सब चुप सह सकते हैं, खुद को सिहँ बताने वाले, कैसे हम सहम सकते हैं। नारी प्रधान नारी सम्मान, सिर्फ नारों तक सीमित होगा क्या? बड़ी बड़ी बातों से ही,  निर्भया को इंसाफ मिलेगा क्या? परंपरा सी बनती जा रही, दो दिन कैंडल मार्च निकालने की, फिर सब भुला देते हैं, जैसे पूरी हो चली हो ज़िम्मेदारी सी। इंसाफ मांगना आदत है, इंसाफ करने की आदत डालनी होगी, नारी के सम्मान के लिये, रानी लक्ष्मीबाई सी हुंकार लगानी होगी। स्वयँ हमे ही लड़ना होगा, हाथोँ में तलवार लिये, शीश धरा को चढ़ाने होंगे, सभी धरा के कातिलों के। बहुत खेल लिया धर्मनिरपेक्ष का खेल, बहुत बन लिए सेक्युलर, हम जैसे थे वैसे अच्छे, अब धर ला दो अत्याचारियों का सर। विनम्र निवेदन है मेरा आज, कानून के सब रखवालों से, छोड़ दो पैरवी करना अब तुम, अपनी माँ बहनों के कातिलों के। एक जुट होकर अपनी पहचान बताओ, सजा दिलाओ उन बेरहमो को, जिनसे लज्जित हो रहा समाज, फाँसी पर लटकाओ उन हरामियों को। pari

प्रेम ही जीवन सुख है

कलम उठायी फिर से आज, दिन बीते हैं बिन अनेकों साज, मन व्यथित था कुछ रोज से, शायद तेरी बिछड़न की सोच से। हिम्मत कर फिर कलम उठायी, खोला एक फिर पन्ना आज, लिख डालूँ सब मंशा मन की, लिख डालूँ दिल के सब राज।। प्रेमवश होकर सबको अपना जाना, प्रेम ही सबको बाँटा निशदिन, प्रेम भाव से कर्म किये हैं, मनुष्य मिले जीवन मे भिन्न भिन्न। पिरो दिये थे मोती अनंत कुछ मंगलमय की कामना में, पग पग पाँव रखे फिर संभल, ज्यों छाले हो पांव में।। फिर से होगा नव सवेरा जीवन में, उम्मीद तिमिर के जाने की, प्रेम के गीत रचे फिर मैंने, आस प्रेम जगत को पाने की। राह कठिन है माना मैंने, लेकिन निष्चय मेरा भी अटल होगा, प्रेम ही जीवन का अनन्त सत्य है, प्रेम ही मेरा धर्म भी होगा।। मेरी हर कृति में प्रेम दिखेलु, सर्वजन हिताय संदेश दिखेलु। अपना पराया सीमा छोड़, परोपकार से नाता होगा, मेरी हर ख्वाइश में प्रेम मिलेगा, मेरी हर इच्छा में प्रेम दिखेलु। तुम भी कोशिश अनुसरण करना, जीवन मे बस प्रेम ही भरना। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

तोलो फिर बोलो, प्रेम रस जीवन मे घोलो

सलवटें पड़ ही जाती है रिश्तों में अक्सर एक वक्त पर, बेवजह जब गिले-शिकवे जमा कर जातें हैं हम जहन पर। कुछ कहना है तो कहो, लेकिन पहले उस बात की गहराई समझो, खुद के दिल से जोड़ों बात को, फिर कहीं उसका रस घोलो। स्वयं ही तुम स्वयं को समझा लोगे, अगर शब्दो का सही चुनाव कर लोगे, गिले शिकवे स्वतः ही मिट जाएंगे, पराये भी अपने ही लगने लगेंगे। दिल सबका दुःखता है, शब्द सबको घायल करते हैं, कोई रो जाता है सुनकर, किसी की मुस्कान दिखती है। बेवजह ही ग्रीष्मकाल का अनुभव करना ठीक नही होता, शांत और शीतल मन ही सुख का आभास कराता है।। शब्दों का तुम जरा ख्याल रखना, पहले तोलना फिर बोलना, मुकाम हासिल होगा जरूर तुम्हें, बस अकाश के साथ जमीं का भी ख्याल रखना। संयम संग मुस्कान की अलग होती है पहचान, ख्याल रखो अगर सबका, अलग दिखेगी तुम्हारी शान। तेरा मेरा मत करना, सब दुनिया मे है मायाजाल, प्रेम ही जीवन प्रेम ही ईश्वर, दुनिया मे बस एक मिशाल।। शब्दों का चयन करना एक कला है, और इस कला में माहिर हर कोई नहीं, सोच समझकर उपयोग करना, शब्दों का अपना कोई रोल नहीं। किस्से कहानियां तो बन ही जाएंगी, तुम उम्रभर...

मेरी वाईस मेरी चॉइस

सिर्फ चुनाव की बात नहीं, बात करो अधिकारों की, वादों से कुछ नहीं होगा, ताकत दिखाओ तुम इरादों की। मैं मैं करती बकरी मर गयी, नहीं कोई आवाज है सुनता, नेक इरादे और दृढ़ संकल्प, सिर्फ व्यकितत्व में है दिखता।। जीत की ख्वाइश लेकर तो, सब किस्मत आजमाते हैं, विकास की लेकिन ख्वाइश भुलो, कुछ ही बस रख पातें हैं। बरसाती मेढक बनकर जो, सिर्फ चुनावों में ही दिखतें हैं, सोचो जरा तुम एक बार, क्या वो फिक्र तुम्हारी करते हैं।। बात नही ये चॉइस की है, बात है दिदो आजमाइश की, कुछ पल का ये खेल नहीं, कोशिश है ये सालों की। तेरा मेरा नहीं है इसमें, बात होनी है फिर हम सब की, दारु मुर्गा बुगटया नहीं, होनी दौड़ है फिर सबके विकास की।। कच्ची पक्की सब देख ली, देख ली देशी विदेशी सब, जो बात करेगा मेरे हक की भुला, वोट मिलेगा उसको अब। रातों के अंधेरे में आते है जो, उनके लिए एक बात है मेरी, उजालों में अब बात करो, नहीं तो पड़ेगी लठ बिना होकर देरी।। Pari

मेरा नेता मेरा ग्राम निवासी

थोड़ा सा हम जागे हैं, थोड़ी सी और जरूरत है, क्यूँ हम दें साथ तुम्हारा, पूछने की अब जरूरत है। सालों से बस चुपकर थे, आवाज बुलन्द अब करो जरा, वोट तुम्हारा मांगे जो भी, लक्ष्य उसका पहले पूछो तुम।। पैसा रुतबा मत देखना तुम, रौब से भी मत डरना तुम, सोच भविष्य की रखना और, चेहरे बच्चो के देखना तुम। दूरदर्शिता है किसमें भरी, जन कल्याण की है भावना, मतदान केन्द्र जाने से पहले, खुद से ये सवाल तुम करना।। पहुँच में हो हर जरूरत में, बेझिझक तुम उससे बात कर सको, जात पात से उठकर भी, न्याय निहित तुम उससे ले सको। सुख दुःख में जो साथ रहेगा, निवास गाँव जिसका बना रहेगा, निश्चित ही है मित्रो मेरे, ग्राम विकास सिर्फ वही कर सकेगा।। मेरी है एक व्यक्तिगत राय, जिससे मिले हम सबको न्याय, मेरा नेतृत्व वही कर सकेगा, हरपल जो मेरे साथ खड़ा रहेगा। ऐसा होना तभी है संभव, जब मेरा नेता मेरे गांव में रहेगा, मेरे हित में अपना हित खोज, ग्राम विकास वो कार्य करेगा।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

एक चुनाव विकास का

नवयुग का निर्माण करेंगे, नयी सोच को देना मौका होगा, तोड़ परम्परा यारी दोस्ती, विकास का अब विचार होगा। बहकावे बहुत हो चले, अब मुद्दों पर जो बात करेगा। हो चलना संग तुम उसके, जो समाज विकास की बात करेगा। छोटी छोटी जरूरतें है अपनी, लेकिन बहुत जरूरी हैं सालों से है नेता चुन रहे, क्यों फिर भी सब अधूरी हैँ। सिर्फ हाँ में हाँ मिलना काफी नही, अब आवाज उठानी होगी, चुनाव उसी का करना तुम अब, जिसकी सोच सच्ची होगी। वादों का वक्त चला गया, अब ज़मीन से जुड़ाव देखेंगे बड़ी बड़ी बातों से नहीं, हकीकत का सामना करेंगे, योग्यता का आधार देखेंगे, व्यक्ति की क्षमता देखेंगें, परदेशी है? या पडोसी, गाँव मे उसका घर देखेंगे। दारू मुर्गा नही चाहिए, ना ही खायेंगे बुगट्या हम न कोई अब प्रलोभन चाहिए, नोट पर बिकेंगे न अब हम। सही दिशा और सही राह पर, बच्चों का हम भविष्य चुनेंगे, आओ मिलकर प्रण करो, अब निष्पक्ष और सही चुनाव करेंगे।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

ख्याल ख्याल में 14

यूहीं तन्हा सा महसूस होने लगा तुझसे दूर होकर, फिर मन बनाया और चल पड़ा तुझसे मुलाकात को मैं। युहीं तुम चुप्पी बनाये बैठे हो, शायद तुम्हे इसका अंजाम मालूम नहीँ, बयाँ करने से मिटते हैं गीले शिकवे, मौन रहकर सिर्फ दूरियां बढ़ती हैं। इश्क़ जो है तुमसे तो जैसे कोई गुनाह हो गया, हर बार तुम बेकसूर और मैं गुनहगार हो गया। इसी तरह तुम बस इजहारे मोहब्बत किया करो, लुट भी गये तेरे इश्क़ में तो शिकवा नही होगा। कुछ बात है होठों में दबी सी, आँखे जैसे करना चाहे कुछ बयाँ, नजाकत कुछ अलग सी अदाओं में, मिजाज फिर भी तेरा खुशनुमा.. दिन भले कैसे भी कट जाए, रातें बस तेरी यादों से दबी है, मुस्कान चेहरे पर ला देता है हर कोई, ये आंखें तो बस तेरी कमी से भरी हैं. मुस्कान जो चेहरे पर है, यकिनन तेरे ही ख्याल से है। यूँही तो तनहाई पसन्द नहीं, ये तो तेरे ख्यालों में खोने की चाह है। कुदरत के करिश्में से तुम आकर मेरे सामने बैठ गयी, फिर नजरें चुराकर तेरा देखना सारी दुनिया भुला गया। वो तेरी शराबी आँखे, घुंगराली लटायें, और गुलाबी गाल, संग मुस्कान होंठों की कर गयी अनेकों सवाल। नयनों की भाषा नयन ही जाने,...

मेरी कविता मेरे शब्द

मैं यूहीं तो शब्द संजोता नही था, शायद कोई किताब होना बाकी थी, वक्त बेवक्त कुछ लम्हें लिखता था, फिर यादें जो अताह बनानी थी। कुछ जज्बातों को उतारा है मैंने, कुछ को यूहीं भुलाना सही समझा, जो दे दिलो को सुकूँ संजो दिया, बेचैनी को बस स्वयं तक सीमित कर दिया। आये फिर लम्हें कुछ ऐसे भी, मन मेरा भी हुआ प्रफुल्लित, आशाओं का ज्वार उठा, देख मेरा मन हुआ प्रशनचित। कोई सुन्दर सा सपना फिर, मेरी भी निंद उड़ा गया, कुछ अच्छा लगा मुझे भी फिर ,जैसे जीवन का रुख गया। कुछ लम्हों को संजोने की कोशिश थी, कुछ अनचाहे लम्हें मिल गये, दिल की चाहत पूरी न हुयी, कुछ अपने न जाने कहाँ खो गये। बेकल ही होती है पूरी ख्वाहिशें, बाकी सब सपना ही बना रहता है, पल पल समय गुजरा जैसे रेत हाथों से, बस काश बाकी बचा रहता है। मेरी हर पंक्ति का हर शब्द मेरी कहानी होगा, ये जरूरी तो नही होगा, लेकिन मेरे अनुभव मेरी कल्पना को जरूर कविता का रूप देगा।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

ख्याल ख्याल में 13

शब्दों का प्रयोग किया जिसने, शब्दो की मर्यादा रखकर। इंसान वही है जीवित जग में, व्यंग्य करे जो अपनी मर्यादा में रहकर।। मेरी मासूमियत को मेरी कमजोरी समझ गए वो, वादा जीने मरने का कर यूहीं तनहा छोड़ गए वो। तोड़ दो खामोशियों का सिलसिला अब तुम भी, लो अब मान गये हम और हो चले अब तुम्हारे। खता होउसी शख्स को मेरे हिसाब से, दिल मे छुपे होंगे राज जिसके बेहिसाब से। चिलचिलाती धूप में भी आराम नही करता, दिन हो या रात भरसक प्रयास है करता। थोड़ा संभल कर शब्द चुनना यारो तुम, तुझे पालने को कोई हर कष्ट है सहता।। मैं लिखूं तुझे अपनी गजलों मे, या फिर तेरा जिक्र शायरी में हो मेरी। सब बेवजह का ही फलसफा होगा, अगर तेरा दिल न इससे वाकिफ होगा।। क्यों न जाने रह रहकर तुम मुझे याद आती हो, थोड़ा सुकूँ और बेचैनी बेहिसाब दे जाती हो। चोट मुझे जब लगे कभी, तो दर्द तुम्हीं महसूस करती हो। मेरी हर कामयाबी पर मुझसे ज्यादा, सिर्फ मेरी माँ तुम खुश होती हो।। कुछ खैरियत खुद की भी पूछ ले ऐ ज़िंदगी, बरसों से चली जा रही है तू, बिना कोई सवाल किये। हरे भरे खेतों कों कर बंजर, मैं सीमेंट में पौधे रोपने लगा हूँ,...

देशहित पहला कर्तव्य

अक्सर मैं भी मुस्कुरा देता हूँ, हालत खुद की देखकर, देशभक्त बन बैठे हैं कुछ आज, ईमान खुदका बेचकर। कृपा करना अपनी केशव, बचे रहे इंसानियत जहाँ में, मतभेद रखना आपस में पर, मनभेद का खेल न खेला जाये।। सत्ता के गलियारों का, स्वाद सभी को है भाता, लजीज बिरयानी खाने को, हर सयाना है यहाँ आता। गर्दन तक हो कीचङ में सने, फिर भी कुर्ता है चमकाता, लाखों करोड़ो चटकर जाता, और मजाल जो एक डकार हो आता। मैं ही सच्चा मैं ही काबिल, बस एक दौड़ है जैसे ओलम्पिक की, कुर्सी के लालच के खातिर, होड़ लगी है बस नींचपन की। कोई चोर तो कोई सिपाही, खुद को सर्वोपरि समझते हैं, लोकतंत्र के स्तंभ है जनता, वादों से निशदिन उसको भरमाते हैं।। लेकिन हमको क्या करना है, लड़ने दो नेताओ को, मुफ्त में कोई भीख जो दे दे, खा जाओ बस चुपकर के। देशहित से हमें क्या लेना है, अपना स्वार्थ सिद्द होना जरूरी है, धिक्कार है ऐसे लोगो पर , जिनके लिये देश ज्यादा चमचागिरी जरूरी है। ताज्जुब नहीं है कुछ भी, पढ़े लिखे तो ज्यादा अनपढ़ है, सच दिखता है सामने फिर भी, आँखों मीच हो रहे अंधे हैं। सही सोच और सही निर्णय अगर, लेने की तु...

ख्याल ख्याल में 12

कुछ हवा बदली सी लग रही है, कुछ खुश्बू आज हवाओं में हैं। आज फिर वही मौसम लगता है, मिले थे जब हम तुम पहली पहली बार। शब्द चुने थे तारीफ में तेरी, सबके सब खूबसूरत थे, दिदार किया फिर सबने तेरा, न जाने अब वो खो गए कहाँ। मुलाकातों का सिलसिला क्या कम हुआ तेरा मेरा, कुछ लोग समझने लगे हम दूर हो गये। फिर खोला मैंने दरवाजा दिल की खिड़की का, आज भी बस तेरे आने के इंतजार में। दोस्ती की ये बिरासत मिलती है सिर्फ खुशनसीबों को, बाकी क्या पाया क्या खोया हिसाब सभी लगाते है। ख़्वाइशों का सिलसिला है, कभी ये खत्म होगा नहीं, कोई मुझे पसंद नहीं, तो किसी को मैं इस जहाँ में। मैंने पूछ ही लिया उससे एक सवाल और आज, किस्मत में नही हो तो फिर दिल मे क्यों उतर गये? अलविदा भी बोल गये और मुड़मुड़ के भी देखते हो, मोहब्बत अगर बाकी है, तो रूक जाओ ना हमेशा के लिए। थोड़ी सी हंसी थोड़ी से नजाकत थोड़ी सी मासूमियत थोड़ी सी शरारत न जाने क्या क्या और कैसे किरदार है आपके, डर लगता है उफ्फ कहीं इश्क़ न हो जाये। मैंने सुना तुमने भी इस बार रंगों से दूरी बना ली, वजह पूछने पर तस्वीर मेरी दिखा डाली। कर लो शिकायत तुम...

रंगु कु त्योहार होली

फूलूँ मा फुलार आयी, डाल्यु मा मौल्यार छायी, आओ सभी दगड्यो, देखा होरी कु त्यौहार आयी। मेलु फुली फ्यूंली खिली, डांडयू मा बुराँस हैंसु, आओ मिली सभी दगड्यो, खिलला होरी दगडी ऐंसु... बसंत बयार आयी, खिलीन फूल बनी बनी का, मुखड्यूं मा मौल्यार आयी, माया की जन ऋतु ऐगे प्रेम का रंगु मा भीजिनि क्वी त, कै खुणी रैबार ल्याई, नखरयाली व बांद भी आज, मेरा रंग मा रंगी ग्याई। दगड्यों की टोली चली,  होरी का गीतू बीच, ढोल दमाऊं का दगड देखा, पंडों की रंगत अइँच। कभी बीरुं की बीर गाथा, त कभी प्रेम का गीत सजला, खुदेलु प्राण कैकु, क्वी मेरा आणा कु बाटु देखला।। अपणा बिरणा सभी आज गला भिटेइ जाला, बैर भूलि आज होरी का रंगू मा रंगेला। शान्ति अर प्रेम कु पर्व आवा सभी होली खेला, मन प्रसन्न कैकी आज बस रंगू मा रंगे जावा। होरी का रंग आज रंगला, आपसी द्वेष आज मिटॉला, रंग बिरंगा सभी ह्वे जौला, प्रेम कु पाठ सभु थै पढोला। आवा हे दीदी आवा हे भूलौ, ढोल की ताल मा सभी नचला, झट बौड़ी आवा शहर छोड़ि, प्रेम का गीत संग होली खिलला। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everythi...

ख्याल ख्याल में 11

मैंने तो ज़िन्दगी की किताब खोल दी है तेरे सामने, अब तुम ही ढूँढ़ो अपनी मोहब्बत वाला पन्ना अब। आसान सी जान पडती है मेरी भी ज़िन्दगी दूर से, राह के काँटो को देखना मुमकीन नही सभी के लिए। मुस्कुराते चेहरे के लिए पीछे दर्द भी हो सकता है यारा, ये पहेली को बुझाये ऐसा कोई दिलदार न मिला प्यारा।। अक्सर निकला मैं भी तेरी चाह में खुद को छोड़ पीछे, मानी थी तेरी हर बात और चला तेरे संग यूँ ही आंख मीचे। सिलसिला आज भी अधूरा सा लगता है अपनी मोहब्बत का, आज भी जैसे वहीं हूँ मैं, जहाँ से शुरू हुयी थी कहानी हमारी। जोर जोर से शोर मचाये दिल मे छुपा हो जिसके चोर, शांत भाव से सत्य है चलता समय समय पर होती भोर। जरूरी तो नहीं कि हर बात सिर्फ शब्दो से कह दी जाये, चेहरे के भाव और आँखे भी कह जाती है बहुत कुछ अक्सर। रुक रुककर करवट बदल रहा है मौसम रोज, न जाने कौन वफा और कौन बेवफा हुये जा रहा है। आँख खुलते ही तेरा दिदार हो मेरा दिल चाहता है, तेरी मोहब्बत पर बस मेरा हक मेरा दिल चाहता है। चलो फिर चलते हैं साथ साथ कुछ पल जीवन राहों में, फैसला फिर बदलते है खुश रहने की चाहत का। सब्र से बढ़कर कोई तप ...

आँखे नम तुम कर गये

आंखें नम है दिल है रो रहा, क्यों देश मेरा रोज एक बेटा खो रहा? समय आ गया निर्णय का, क्यों दुश्मन देश का अभी भी जी रहा? छोड़ दो मेरे बीर जवानो अब कुछ भी रहम दिखाना तुम, तोड़ सब्र का बांध दिखाओ औकात दुश्मन को उसकी तुम। पूरा देश खड़ा है साथ तुम्हारे, हर फैसला तुम्हारा मान्य होगा, बता देना अब पूरी दुनिया को, देश का दुश्मन अब सिर्फ कब्र में होगा। कोई निंदा कोई अफसोस अब हमको नहीं अब दिखाना है, शब्दों का अब वक़्त नहीं,  हथियारों की भाषा से समझाना है। माना गला रुंधा हुआ है, आँसू आँख से रुकते नही है, पल पल यादें कटोच रही है, सूरत आंखों में घूम रही। अंगारों को जलते रखना अंतिम अपनी सांसो तक, आराम नही करना कातिल एक भी जिंदा जो जब तक। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

ख्याल ख्याल में 10

मैंने तो बस एक सीधा सा सवाल किया था, जवाब में वो बस रूठ कर चली गयी। मेरा तो मिजाज ही कुछ ऐसा है, जो कहता हूँ सीधे कह देता हूँ। मैं उनमें से नहीं हो सकता कभी भी, कि कुछ कह जाऊं और फिर मुकर जाऊं. न जाने कैसा गुरुर है उसे, अपनी उस पलभर की दौलत का, मैं देख उसे बस मुस्कुरा दिया, सोच हष्र दोनों मुफलिस और अमीरी का। मेरा तो दिल ही ऐसा है, बस रहना चाहूँ तेरी बाहों की कैद में, मैंने तो कबूल लिया गुनाह मोहब्बत का, अब बस तेरी सजा का इंतज़ार है। मैं तो हमेशा से ही खोया रहता हूं तेरे इश्क में यारा, कभी तेरी यादों के संग और कभी साथ तेरे। आशिकों का मिजाज हर उम्र में एक सा था, फिर समझ आया ये बुखार भी उम्र देखकर नहीं आता। न जाने कैसी रस्याण थी तेरी उन बातों में, सालों बाद भी अभी सैदी सी लगती हैं आज भी। माना कि तुझसे मोहब्बत है मुझे कुबूल, लेकिन तेरी तरह शर्तो की राहों पर चलकर नहीं। कैसे हो विकास देश का हाथों से जवानों के, जवानी तो कैद पड़ी है फेसबुक और व्हाट्सएप के तहखानों में। दिल को बुझाने के लिये अनेक ख्यालो को दिल मे पनाह दी, लेकिन जो सुकूँ दिलाये वो ख्याल आज भी तेरे आने...

ख्याल ख्याल में 9

बहुत जालिम है जनाब इन सर्द रातों की खुमारी, तू भी राजी मैं भी राजी और न चाहकर भी ये दूरी। हर साल ही दिन महीने निकल जाया करते हैं, एक तेरे आने की आस है ठहरी हुयी बस...। क्यों बरस जाते हो अक्सर बादलों की तरह तुम, अभी मोहब्बत का बुखार उतरा भी नही और तुमने फिर भिगो दिया। नजरें जो मिली तुमसे आज, फिर से वही किस्सा याद आ गया। वो तेरा देखकर नजरें झुकाना, और मुझे इसी लम्हे का इंतजार।। तनहा तनहा हो चली है जिंदगी बिन तेरे, आ भी जाओ कुछ पल निकाल मेरे पास अब तुम। सारी कोशिश बेकार सी होती जा रही है, मौसम और साल बदला लेकिन तुम्हारा मिजाज आज भी वही। सारी रस्में और सारी कसमें सब मेरे लिये, तुम छोड़कर जाओ बेवजह और फिर कसूर भी मेरे लिये। यूँ तो ख्वाब मैं भी देखता हूँ तेरे होने और तुझे पलकों में बिठाने के, फिर समझाता हूँ खुद कि क्या कभी चाँद चकोर का हुआ है.?? रोते हुओं को हसाया है, गैरो को भी अपना बनाया, मेरी क्या मजाल भुला दूँ, मैने तो तुम्हें पलकों पर है सजाया। यूँ जो तुम आती हो पास मुस्कुरा कर, तेरी यही वो अदा है जिसपर सारा जहाँ कुर्वान है। होंठो की लाली और कानों में बाली,...

मेरी खुद मेरु प्राण

लौकणी कुयेड़ि होली मेरा घौर गौं मा, ठण्डी हवा पाणी बगणु होलु नॉला पंदेरों मा। बांद व नखरयाली देखणी होली सुपन्या मेरा, ऑंखयु मा जग्वाल वीन्का प्रीत दगड जिकुड़ा मा।। बिन्सर की बेला होली, रमदी गौड़ी छानी मा, दादी बैठि चुल्ला खांदा, दादा कु हुक्का थुमणि मा। मांजी ग्युलु करदी छानी, बैठ्या होला बाबाजी दिवली मा, दीदी जाणी होली इसकुल, भुला लुक्युं खतणी मा।। गैल्या मेरा सभी घौर, क्वी बकरा क्वी जयूँ होलु गोरु मा, पधनी बौ कु ककडाट अर, दगड डॉर भैजीकी ऑंखयु मा। बोडा सगडो पाणी चरणु, बोडी जयीं होली बणु मा, आओ घंटी बजदी जनि, दौड़दा इसकुल्या इस्कूलूँ मा।। मेरी भी याद बसीं छन, वखि आज भी बाटा अर घाटों मा, माल्टा, मसूर, प्याज, ककड़ी, स्यो अर अखोडूं की चोरी मा। गिल्ली डंडा, गुच्छी, खो खो, अर मारामपिट्टी की चोट मा, किताब कॉपी, स्कूलै घंटी ,गुरुजी की डैर अर कंडाली का टैर मा, बस्यूं च प्राण मेरु अभी भी वख, चौका पंदेरा खेत अर खल्याणु मा, वो स्वाणु दगडू भलु गैल्यों कुं, अर मायदारु की माया मा। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

मेरी कोशिश मेरा प्रयास

कहने को कोई शब्द नही है, तुम तारीफ ऐसी कर जाते हो, समय थोड़ा ही हुआ हमें मिले, फिर भी हक कुछ अधिक दे जाते हो। यूँ तो मुश्किल कहना होता है, तुम जाने कब से पहचाने लगते हो, मोड़ अनेकों आये और चले गये, तुम कोई हिस्सा दिल का ठहरा दिखते हो।। जीवन की है डोर ये कच्ची, तुम धागा कोई पक्का इसका लगते हो, संग है हमारे साथ तुम्हारा, कोई ख्वाब सुहाना दिखते हो। मिलजुल कर ही मंजिल मिलती है, संग साथ चलोगे कहते हो, ऐसा हो अगर कोई दोस्त साथ, फिर सफल जीवन तुम कह सकते हो।। दिल मे रखें हैं अरमान अनेकों, कितने होंगे पूरे कह नहीं सकते, कोशिश रहती है रोज ही फिर, न कोई ख्वाब किसी का टूटे मुझसे। खुद को दे दूं चोट भले ही, कोई अपना-पराया यार रूठे ना, दिल मे रह जाऊँ आपके हमेशा, मन मे सदा बस एक है आशा। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

ख्याल ख्याल में 8

चली है फिर बयार आज वही पहले वाली खुश्बू संग, क्या कोई सूखा पेड़ फिर हरा हुआ होगा क्या... सतह पर पहुँच कर तो देखो, फिर गहराई का एहसास होगा, यूँ किनारे बैठ सागर की गहराई नहीं नापी जाती। जी आया हूँ कुछ पल ज़िंदगी के अपनी मन मुराद से, न जाने फिर वो लम्हे फिर मिले न मिले। थोड़ा सा धुँआ जो फैला चारो तरफ गलतफहमी का, हर रिश्ता न जाने क्यों धुंधला सा हो गया। कुछ यादें है अतीत की बसी, कुछ कहना चाहते है ये बंजर मकान भी, कुछ याद न आये तस्वीर से , तो देख आना अपना गांव घर एक बार फिर..। न कर कोई फैसला जल्दबाजी में, थोड़ा सब्र कर फैसला करने से पहले, मायने हर भाव में होते हैं गौर करना, ग्लास खाली है या भरा सिर्फ नजरिया भर है.. कुछ लब्ज जो कह दिए मैंने सच्चाई संग तेरे लिये, आज अनजाने हो चले जो अजीज़ थे तुम्हें कल हम...? निकल जाओ छोड़ सपनो को चादर में ही अब, हल्की हल्की भोर आ चली है दीदार को तुम्हारे....! यूँ तो ये मंजर है जवानी का, हर तरफ सिर्फ मोहब्बत ही नजर आती है, कैसे कह दूं कि तुम ठीक हो, बेशर्मी का आलम भी तो देखो अपना। सही है आज तुमने सब साफ तो कर दिया, अब कोई तकलीफ नहीं होग...