कल्पनाओं के संसार से
कुछ शब्द मैंने भी पढ़े, श्रृंगार को समर्पित हुये। कुछ बातें सच्ची थी, कुछ भ्रम थे जैसे किये। लेकिन सच था कि श्रृंगार तो बस इक छलावा है, प्रेम ही आधार है जीवन, प्रेम ही बस एक बुलावा है.. pari वो वादा भी झूठा था, वो इरादा भी झूठा था, झुकीं नजरो से देखा, वो निगाहों का झुकना भी झूठा। बस एक फरेब था धोका था इश्क़ तेरा, वो मुलाकात भी झूठी थी, वो प्यार भी झूठा।। Pari कभी कभी तो कलम भी लिखने को मना करती है, पहचान वालो के बेशर्मी भरे जब दिखावे देखती है। हर बात का बस दिखावा भर रह गया है कहकर, मेरे हाथों से खुद को छिटकती है वो अक्सर..! pari थोड़ी शरारत करता हूँ, जो मन करे वो कर जाता हूँ, न चाहकर भी अक्सर, तुन्हें परेशान मैं करता हूँ। माना की नादान हूँ पागलपन रास है मुझे आता, फिर झूट का भी तुमपर.. गुस्सा न जाने क्यूँ नही आता..! pari रात थोड़ी काली थी, लेकिन सुबह अधिक निराली थी, पतझड़ मन को चुभता है, लेकिन सावन अधिक मनमोहक था। जीवन का भी बस यही खेल है सच मानो तो, दुःख दर्द बहुत देता है, लेकिन सुख की अनुभूति अधिक निराली है...pari✍️ चलना तो तुन्हें ही है, राह तो वहीँ पड़ी रहेगी कोशिशें हों अगर भरपूर, मंजिल ...