एक चुनाव विकास का

नवयुग का निर्माण करेंगे, नयी सोच को देना मौका होगा,
तोड़ परम्परा यारी दोस्ती, विकास का अब विचार होगा।
बहकावे बहुत हो चले, अब मुद्दों पर जो बात करेगा।
हो चलना संग तुम उसके, जो समाज विकास की बात करेगा।

छोटी छोटी जरूरतें है अपनी, लेकिन बहुत जरूरी हैं
सालों से है नेता चुन रहे, क्यों फिर भी सब अधूरी हैँ।
सिर्फ हाँ में हाँ मिलना काफी नही, अब आवाज उठानी होगी,
चुनाव उसी का करना तुम अब, जिसकी सोच सच्ची होगी।

वादों का वक्त चला गया, अब ज़मीन से जुड़ाव देखेंगे
बड़ी बड़ी बातों से नहीं, हकीकत का सामना करेंगे,
योग्यता का आधार देखेंगे, व्यक्ति की क्षमता देखेंगें,
परदेशी है? या पडोसी, गाँव मे उसका घर देखेंगे।

दारू मुर्गा नही चाहिए, ना ही खायेंगे बुगट्या हम
न कोई अब प्रलोभन चाहिए, नोट पर बिकेंगे न अब हम।
सही दिशा और सही राह पर, बच्चों का हम भविष्य चुनेंगे,
आओ मिलकर प्रण करो, अब निष्पक्ष और सही चुनाव करेंगे।।
Pari


© ® Pari....

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