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Showing posts from September, 2020

मेरी मुस्कान मेरी पहचान

क्या करें क्या न करें, क्यों ऐसी स्थिति पैदा हुयी है, अधिकारों का उपयोग जो, सही से नही किया है। देखभाल कर भी तुमने गलत निर्णय जो लिया था, दोष अब देना क्यों, खुद गलत व्यक्ति तुमने चुना था।। जात पात की होड़ में, काबिल को तुमने चुका दिया, अहम अपना आज दिखाने को, कल तुमने ठुकरा दिया। पाछ पछताये निरर्थक है, समय से जो जागे नहीं, निश्चित है आज हार तुम्हारी, समय पर जो भागे नहीं।। अवसर का क्या है वो तो, आकर फिर चला जायेगा, आँख मूंद जो बैठे तो, क्या समय वहीं ठहर जायेगा। रात के बाद सवेरा है लेकिन, उसपर सबका अधिकार नहीं, वैसे ही धोखेबाजों को, जग में मिलता फिर सहर नहीं।। मैं तो आज यहाँ हूँ लेकिन, फिर कल कोई और होगा, मेरे जैसी सोच फिर होगी, इसपर तो बस संशयः होगा। मेरी मुस्कान कोई व्यंग्य नहीं, लेकिन कुछ को चिढ़ाती है, लाख षड्यंत्रों के बाद भी, मेरी होंठों से ये नहीँ जाती है।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

देवभूमी से प्रेम अतुल्य

 देवभूमी के वासी हम, देवभूमी में रहते हैं, सीमित साधनों में भी जीवन जी लेते हैं। दुनिया की दौड़ धूप से दूर यहाँ, भोजन में कन्द मूल भी चख लेते हैं। साहस अतुल्य है जन जन में, चुटकी में नदी पहाड़ चढ़ लेते हैं। रिस्तों की कद्र हैं करते हम सब, प्रेम में जीवन तक अर्पण कर देते हैं... खुश्बू अलग है इस माटी की, देशप्रेम कण कण में बसता है। कहने की जरूरत नहीं पड़ती, हर दूसरा लाल देश पे मरता है।। अक्सर मुझसे यार मेरे पूछ लेते हैं, देवभूमी की चाहत क्यों है कहते हैं। मैं तो बस इतना सा कह सकता हूँ, देवभूमी में ही तो जीवन को मैं पाता हूँ।। Pari