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Showing posts from July, 2018

सोच बदलें राष्ट्र बदलेगा

चलो एक नयी सोच पैदा करते हैं, सच को सच और झूठ को झूठ कहते हैं, अगर है कोई मुश्किल में पराया भी, मदद उसकी को आगे आते हैं। छोड़ तेरा मेरा आज से हम, बसुधैव कुटुंबकम का नारा सबको देते हैं छोड़ वो जाती धर्म की लड़ाई आज, चलो मिलकर इंसानियत के लिए लड़ते हैं।। सदियां बीती कुछ और फिर चले गये, कल हम भी अलविदा कह जायेंगे, सोच बदल तेरे मेरे की आज सभी, कल शायद इतिहास बना जाएंगे। राहें बदलो मंजिल बदलो मिलकर आज, फिर सवेरा कुछ अलग भी आएगा, आज संभल गए सोच समझ अगर, कल फिर भविष्य तेरे गुण गायेगा।। तू तू मैं मैं बहुत कर लिया अब तो आँखे खोलो तुम, जाती धर्म पर जो है लड़ाते फेंक निकालो उनको तुम। दोहरी सोच दोहरी मानसिकता से निकल बाहर जब आओगे, बेहतर कल बेहतर भविष्य नयी पीढ़ी को दे पाओगे।। छोड़ो आज से आंख बंद देश के दुश्मन पर भरोसा करना, आपस मे फिर लड़ा तुम्हे खुद की रोटी है इन्हें सेकना। तुम कट मर जाओगे फिर भी ये मौज में जीवन काटेंगे, और आज हो फिर कल ये हम सबको बस आपस में लड़वाएँगे।। फिर करलो मिलकर आज संकल्प सभी, जांच परख कर ही चुनना तुम कोई सरदार सही।। Pari ©   ® Pari.... Love is life....

एक संकल्प, नयी भोर की ओर

राह भटक कर देख लिया, गाँव छोड़ कर देख लिया, माँ बाप छोड़ कर शहर चला, घर बार छोड़ कर देख लिया। नाम कमाने मैं निकल पड़ा था, रात में नींद दिन का चैन छोड़ दिया, आज बरसों बाद एहसास हुआ है, इतना सब छोड़ मैंने क्या पा लिया।। किराये के कमरे में रहता हूँ, परिवार का चेहरा देखने को तरसता हूँ, कभी खाना खाता हूं यहाँ, तो कभी भूखे ही काम पर जाता हूँ। न पड़ोसी मुझे जानता है आज भी, न मैं अपनी दिनचर्या से खुश रहता हूँ, सोचा था जो बरसों पहले बड़ी समझ से, आज खुद की गलती पर रोता हूँ।। न होली मनती अपनो संग आज, न दीवाली पर दीप जलते हैं, आज रहकर सबसे दूर यारो, रिस्ते भी बस मतलव पर चलते हैं। जन्म हो या भले मृत्यु किसी की, सुखदुःख साझा करने का वक्त नही, रिश्तों में रह गया आज बस दिखावा, कोई जिये मरे आज किसी को फर्क नहीं।। निकल पड़े आज सभी एक साथ, शुरू हो रखी सबमें एक दौड़ नयी, कहने को सब दौड़ते साथ साथ, लेकिन एक दूसरे की तनिक भी फिक्र नही। जीना छोड़ दिया हँसना-रोना छोड़ दिया, खुद को मशीन जैसा बना लिया, शायद आज यही वो वजह है दोस्तो, जो कहती है यार मेरे पास वक्त नही।। आज एक सोच, एक समझ है आयी, जब वक्त नही...

विजय दिवस 26 जुलाई

कुछ सोच अलग सी होगी तुममें, कुछ मंसा मन मे घर की होगी, भूल सारी सुधबुद अपनी तुमने, जान यूहीं तो नही गवाही होगी। कैसा जूनून वो रहा होगा दिल मे, कैसे इरादे वो तुम्हारे होंगें, आयी जब वो घड़ी त्याग की, तुमने कदम आगे बढ़ाये होंगे।। नही फिक्र थी तुमको अपनी, नही जहन में कोई डर बाकी था, सामने दुश्मन देख मातृभूमि के, बस माटी का एक ख्याल बाकी था। न परवाह तुमको सर्द हवा की, न देखी तुमने तपती धूप कहीं, मिट गये तुम मातृभूमि पर तुमने कोई तब न आह भरी।। कोई अकेला था घर मे, कोई ठीक से अपनी उम्र जिया भी नही, कोई था नव पुष्प संजो रहा, कोई कर रहा कामना होली दीवाली की। फिर आया ऐसा झोंका शहादत का, सबने खेली फिर खून की होली, मातृभूमि पर आंच न आये आगे आये सब लगाने जान की बोली। चारो ओर से हो चाहे शत्रु अनेक, चाहे कर लो कोई षडयंत्र एक, सबका जवाब है तुम्हारे तरकश में, चाहे ले आओ बाण अनेक। सीना हरदम तना रहेगा इस मातृभूमि की रक्षा में, सांसो संग शीश भी दे देंगे हम काल को अपनी भिक्षा में। तुम्हे नमन है सदा हमारा, हरदम झुकते तुमपर शीश अनेक, मातृभूमि के बीर सपूतों मिले सदा हमें तुम्हारा आशीष। रह...

मेरी बात मेरा अंदाज

शब्दो का है ये खेल गजब, इसको खेलना जाने कोई कोई, कोशिश सबकी होती है, लेकिन लिखना जाने कोई कोई। कोई भावनाओ को शब्द है देता, कोई किसी का प्यार जताता, लेकिन कोई यादों को अपनी, कलम से कागज पर है उतारता। सबकी अपनी अलग कोशिश, सबके अपने अलग अंदाज, पढ़े जो कोई शब्द जो मेरे, बन जाये सबक बिगड़ा मिजाज। कुछ होती है कल्पनाएं किसी की, कुछ सच है पिरोया जाता, कलम है लिखती सिर्फ वही हमेशा, जो दिल मेरा उसे बताता। मैं भी जुड़ गया अब इससे, करता हूँ खुद से रोज सवाल, क्या मैं चाहता हूँ लिखना, कैसा होगा मेरे शब्दों का जाल। क्या कोई भावना होगी छिपी, या किसी का होगा मायाजाल, लेकिन लिखना जरा अदब से, हो न जाये कहीं कोई बबाल। उठा रखी है मैंने भी कलम, लिखने को कुछ अलग से आज, नहीं लिखुंगा झूठ कभी मैं, ना ही खोलूंगा किसी के कोई राज। हमेशा रखूंगा बस ख्याल एक ही, लिखुंगा सिर्फ अपने दिल की बात, थोड़ा pari की कल्पना होगी, और होगा थोड़ा pari के दिल का राज pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

ख्याल ख्यालो में

थोड़ी सहुलियत जरूर होती है आसान रास्तो से जीवन मे, लेकिन दूर तक अक्सर कठिन रास्तो से ही सफर तय होता है..!! Pari करता है जो दुआ मेरी ख़ैरियत की रोज खुद से पहले, मुझे भी उसका वफादार उम्रभर बना देना ऐ मालिक मेरे.. Pari अक्सर अनकहे फसाने जहन तक सीमित रह कर खो जाते हैं, जो फसाने लबों तक आये वही खूबसूरत कहानी लिख जाते हैं..। pari कुछ बातें सिर्फ किताबों और फिल्मों में अच्छी लगती है, असल जिंदगी में होंठो के फसाने ही समझ आते हैं.....!! pari रोज नए नए सवाल छोड़ जाती है जिंदगी न जाने क्यूँ, कल मैं तुझे अजीज था आज मैं तेरा दुश्मन कैसे..??? Pari सुलझ जातें है दिल मे पड़ी उलझने में यारो, मौका तो दो लबो को शब्द कहने के लिये। Pari अक्सर नजरें झुका लेती है वो मुझे सामने देखकर, मैंने तो उसे कभी कसूरबार समझा नहीँ। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

धार और खाल रहस्य

जय देवभूमी जय उत्तराखंड जैसा कि मैंने पूछा था उत्तराखंड में धार और खाल नामो के आगे लगाने का कारण क्या हो सकता है... कुछ जवाब मिले लेकिन सटीक कुछ नही जवाब आया.. पहले बात करते हैं धार की...जैसा कि उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है और कहीं भी जाना हो तो पहाड़ी रास्तो से गुजरना पड़ता है जो कि पहाड़ की ऊपरी और निचली दोनों तरफ से हो कर निकलता है, पहाड़ के ऊपरी भाग को धार कहा जाता है और जो भी गाँव पहाड़ के ऊपरी भाग में स्थित होता है उस धार की वजह से उसके नाम के साथ धार जोड़ दिया जाता है....इसलिए अक्सर पहाड़ के ऊपर स्थित गाँव को धार से जाना जाता है.... अब करते है बात खाल की..शायद ज्यादातर को विदित होगा कि खाल क्या होता है...आज ही नही बल्कि बहुत सालों पहले से खाल का इस्तेमाल या कहें तो निर्माण पहाड़ों में होता रहा है...पहाड़ो में बारिश अधिक होती है और यहाँ पानी को जमा करने के लिये बड़े बड़े गड्डे बनाये जाते है और उनमें पानी का जमाव होता है और ये एक तो सिंचाई एवं पालतू एवं जंगली जानवरों के पानी के काम आते हैं और साथ ही जमीन में जलस्तर को बनाये रखने में मदद करते हैं और जहाँ जहाँ इन खालो का निर्माण हुआ और लंबे ...

मैं और मेरी संस्कृति, बचाओ

जय भैरवनाथ जय बद्री बिशाल जैसा कि अक्सर होता है कि हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे होते हैं और कुछ सहज असहज घटनाएं हमारे आसपास होती है, उसमें से ज्यादातर पर हम ध्यान तक नही देते और आगे बढ़ जाते है... शायद वो ज्यादातर घटनाएं हमारी व्यक्तिगत जीवन पर असर नही डालती इसलिए हम उसपर ध्यान नही देते और आगे बढ़ जाते हैं.. आज सुबह ऐसा ही कुछ हुआ मेरे साथ भी, लेकिन आदत से मजबूर मैंने कलम उठायी और लिखने लगा..हुआ यूं कि मैं रोज की तरह नौकरी से लौट रहा था और अक्सर मन्दिर या फिर घरों में भजन का शोर आता सुनाई देता है जो कि शायद लोगो को अच्छी अनुभूति करवाता है और साथ ही उनका भगवान के प्रति कर्तव्य पूरा होता है यह सोच होती होगी.. जैसा कि मैंने बताया मैं रोज की तरह नौकरी से सुबह लौट रहा था और आज मैंने रोजवाला नही बल्कि दूसरा रास्ता लिया कमरे में आने के लिए, और मेरे कानों में एक घर जो गढ़वाली परिवार "भंडारी जी" का है से आवाज सुनाई दी, लेकिन ये क्या ये भजन नही थे उसकी जगह एक गढ़वाली गीत गढरत्न श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी का था और उसे सुन मैं जरा रूक गया..गीत के बोल चल रहे थे "कखन दयखण लठ्याल...