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Showing posts from April, 2026

पंछी पिंजरे सा उड़ जाऊंगा

प्रेम है उससे मेरा निश्छल, नहीं कोई उसमें स्वार्थ भरा, हर सांस है मेरी उसके नाम, कुछ भी नहीं अपने पास धरा। मेरी परीक्षा वो कभी भी करे, मै हरदम ही रहता तत्पर हूं, प्रेम में उसके मै डूबा प्रतिपल, उसी के लिए जैसे अब जीता हूं।। हर रोज उसकी याद है आती, नम आंखे अपनी छिपाता हूं, जान न सके कोई राज ये मेरा, आंखों में चश्मा लगाता हूं। मेरे प्रेम की वो परिभाषा, जीवन के मेरे है इक अभिलाषा, मैं बस उसको देखता हूं, वो पढ़ती है मेरे नयनों की भाषा।। अनेकों बार समझा चुका हूं, लेकिन वो कहां राजी होती है, मैं हूं उसके प्रेम में डूबा, वो बस इसे पागलपन बताती है। मेरी है नादानी या कुछ और, हर पल याद उसकी सताती है, मैं हूं तनहा आज भी यारो, वो बस ख्वाबों ख्यालों में आती है।। मेरे प्रेम को आजमा रही, मुझसे खेला वो करने है लगी, सब कुछ है न्यौछावर उसपर, सबको ढोंग वो बताने लगी। प्रेम है मेरा उससे अविरल, तन की भूख वो समझने लगी, दूर जाने पर सोचेगी वो, आज भले नासमझी है करने लगी।। यादों का पिटारा दे जाऊंगा, झोली में सितारे भर जाऊंगा। प्रेम करूंगा निश्छल अविरल, काया छूने का प्रयास नहीं करूंगा। प्रेम परीक्षा है अगर बिछड़न...

बिन तेरे अब कोई आस नहीं है "वैराग्य"

थोड़ा समय अवश्य लगता है, लेकिन फिल्म समझ में आ जाती है, हर बार नायक सही नहीं होता, कभी कभी कहानी बदलनी पड़ती है। सावन तो यूहीं बदनाम होता है, मौसम तो प्रेमिकाएं बदलती हैं, रंग बिरंगे धर के रूप, नायकों को ये निशदिन ही छलती हैं। बादल तो बरस कर चल देते हैं, बस रह जाती है बारिश तनहा, जैसे पतझड़ के आने पर, पेड़ सहे पत्तो का बिछड़ना। हर एक पत्ता टूट जाता है, खाली बच जाती है ठूंठ, तेरी विरह में मै भी लुट गया, खंडर पीछे गया बस छूट। आखिर कब तक विरह सहें, यादों के सहारे हम जियें, कौन सी देहली अब तन रगड़ें, कौन सी सजा अब हम सहें। आखिर कब तक तप करना होगा, कितने साल अभी जपना होगा। अब तो आ जा टीस मिटा जा, कब तनहा बिन तेरा रहना होगा।। ख्वाब भी सारे बिखर गए, अब तो बस एक आस बाकी है, दुनिया सारी पीछे छूटी, तेरे मिलन की बस प्यास बाकी है। अब तो बंधन तोड़ के आ जा, सारे झरोखे मोड के आ जा, तेरे लिए ही ये सांस बाकी है, तेरे मिलन को ये जान बाकी है।। अधिक लिखने का हाल नहीं है, प्रेम के अलावा कोई जाल नहीं है, कलम की स्याही बिखर गई है, कलम में अब वो ताकत नहीं है। मुझको अंतिम दर्शन दे जा, बिन तेरे जीना कोई आस नहीं...

तेरी यादों की बारात रुक गई

कुछ सुकूँ तो दिल को जरूर मिल गया है, तेरी मुस्कान का दीदार जो हो गया है। वर्षों से प्यासी थी जो आँखे एक झलक को, जैसे आज कोई अमृत रस पान हो गया है।। क्या कहूँ तुझे कैसा ये इंतज़ार था मेरा, बिन तेरे जैसे हर तरफ बस था अँधेरा। हर आस भी अब दम तोड़ने को थी जैसे, आने से तेरे एक जीवन प्राण मिला इसे। अगर होती कोई तपस्या तेरे मिलन को, हंस कर वर्षों किया करते हम भी तेरे लिए। दुवाओं के सिवा कोई विकल्प न था पास यारा, बस ताउम्र बस एक वही तो करते रहे। साथ जो छूट गया एक बार, फिर कहां मुलाकात होती है, दूर जाने के बाद तो बस, अपनी भी जैसे परायी होती है। आखिरी मुलाकात से लेकर आखिरी झुकी निगाहें तेरी। फिर सारे गम मेरे हो गए और खुशियां तमाम हो गई तेरी।। चल अब वादा कर की भूल जाएंगे हम एक दूजे को, अगर हुई मुलाकात तो समझेंगे अजनबी हम दोनों को। सारी यादों मुलाकातों को बस सीने में छुपाकर रखेंगे, सिले होंठों के साथ ही दुनियां को अलविदा हम कहेंगे।। Pari ✍️ 

जीवन आम आदमी का✍️

ज़िम्मेदारी के बोझ तले आम आदमी इतना दब जाता है, की हजार तकलीफ क्यों न हो डॉक्टर के पास नहीं जाता है। हो अनेकों कष्ट फिर भी, हसकर टाल जाता है, कोई बीमारी न निकल आये सोच अस्पताल नहीं जाता है। अक्सर ही वो दवाई केमिस्ट से ले कर चुपचाप खाता है, कुछ नहीं कुछ नहीं कहकर सारे दर्द यूहीं वो छुपाता है। पैसे खर्च न हो जाएं कहीं, टेस्ट की पर्ची छुपा लेता है, सब ठीक है डॉक्टर है बोला, सबको जाकर फिर कहता है। ना कोई उसकी फिक्र है करता, ना कोई रखता उसका ध्यान, अक्सर ही तो सिर्फ जरुरत पर ही, होता है उसका सम्मान। बारिश हो या फिर धूप कभी, दिन हो या फिर रात घनी, बेहिचक ही निकल पड़ता है, वो चाहे हो कोई आगजनी। आम आदमी का जीवन, जैसे कोई हलाहल पीना है, जीवन के संघर्ष अनेकों संग, घुटघुट कर ही तो जीना है। Pari ✍️ 

Pari की कल्पना "परिकल्पना"

मैं लिखू जो कुछ तो तुम उसे सिर्फ तारीफ न समझना, दिल की बात होठों से कहो, यूँ बस आहें न भरना। थोड़ी देर से भले लेकिन मुलाकात तो होगी ही जनाब, पूरा न हो ऐसा दुनिया में, होता नहीं है कोई ख्वाब। न कोई किस्सा था न ही कोई कहानी थी, मोहब्बत तो होनी ही थी, छायी जो जवानी थी। सर्द हवाओं के मौसम संग लाये मोहब्बत की गर्माहट, लौट आये हम पास तुम्हारे, अब गले लगा लो हमें फटाफट। दिल से सोची हुयी हर मुराद कुदरत अक्सर निभाती है, सच्चे दिल से हो अगर मोहब्बत तो मुलकात भी हो ही जाती है। किया था बयाँ शब्दो में, तेरी यादों और तेरी कमी दोनो को, कुछ समझे और चुप रह गए, बाकी तारीफ में वाह वाह कर गए।। यूहीं नहीं है तनहा हम, तेरा इंतजार आज भी है, तू कहां कैसी है खबर न सही, तेरा ख्याल तो आज भी है। दिल में मलाल आज भी है, तेरा ख्याल आज भी है, वादा था तुझसे मिलने का, वो सवाल आज भी है। भूल जाएं तुम्हे हम, या फिर अभी और इंतज़ार किया जाए, तुम ही बताओ "Pari" आगे और क्या किया जाए। Pari ✍️ 

पिता का जीवन आसान नहीं..!

भाव जागते है मन में, लेकिन शब्द सटीक नही मिल पाते है, सब को साथ लेकर चलते है, फिर पिता को क्यों भूल जाते है। माना थोड़ा दूरी है उनसे, लेकिन सबसे अधिक विश्वास वहीं है, अनेक कष्टों को दबाकर, मुस्कान चेहरे पर लाये वही पिता है।। शब्दो मे शख्ती है उनके हरदम, क्योंकि फिक्र है सबकी पल पल, अंदर से कोमल पर कठोर दिखावा, प्यार पिता का है निश्छल। राह कठिन है चलना मुश्किल, लेकिन फिर भी धैर्य रखे जो, आये कितने आंधी तूफान, संयम बनाये रखना पिता से तुम सीखो।। चाहे कितने दोस्त बना लो, बनालो चाहे कितना दौलत शोहरत, मिले सुकुन जिस छांव में तुमको, मिलेगी बस वो पिता के घर पर। खुद से तुम एक सवाल कर लेना, पिता का जीवन तुम खुद जी लेना, कितना भार है कंधो पर, खुद उठा कर फिर तुम तुलना करना।। बहुत ही आसान जान पड़ता है, जीवन किसी पिता का जग में, चिन्ता फिक्र से हटकर जैसे, सुकून भरा हो सारा जीवन। कैसे कैसे मौसम आये फिर, कैसा तुमने वक़्त है देखा, कितने पतझड़ मौल्यार है देखे, न जाने कितनी बरसातें है देखी। खुद को डुबाकर उलझनों में, परिवार सुरक्षित हैं रखते, भरा हो गला या दिल टूट चुका हो, शिकन माथे पर न ...

माँ की गोद और असमां के तारे

सांझ हुई तो छत पर आया, आसमान को देखा आज, टिमटिम करते तारे अनेक, लगा जैसे सिर पर रखा हो ताज। कुछ पल तो बस सोचता रहा, आसमान में हैं कितने सारे, बचपन फिर याद आ गया, गांव का आंगन और ढेरों तारे।। नटखट था तब मैं भी बहुत, इठलाता चलता था घर के चारों ओर, दिन भर चलती थी शरारत अपनी, माँ बाबा न होते कभी भी बोर। तुतलाती थी बोली मेरी, शब्द कुछ सुलझे तो कुछ उलझे रहते, सुंदर है देखो कान्हा कितना अपना, बस पल पल यही तो कहते।। दिन थे वो बड़े की प्यारे, सब रहते थे गांव में हमारे, चूल्हे पर खाना बनता था, बैठकर खाते एक साथ सारे। मां खिलाती प्यार से रोटी, बाबा भी तो लाड लड़ाते, दादा दादी चाचा चाची सब ही तो मुझे रिझाते।। बचपन की वो यादें हैं, रह रहकर मुझे याद आ जाती है, जीवन के संघर्ष के बीच, मुझे बड़ा सुकून दिलाती हैं। दिन वो मेरे बचपन के, देखो कितने प्यारे थे, मां की गोद में सोता था, और आसमान में लाखों तारे थे। Pari ✍️ 

पिता की प्रीत, छुपी रहने की रीत

टीस मन की वो मन में रह गयी, बात पूरी न हो सकी अधूरी रह गयी। मैंने सोचा था अब दिन खुशहाल हो गए, लेकिन हम आज भी जस के तस रह गए। गर्भवती हुई स्त्री, सबको सहर्ष ज्ञात हो था चला, फिर क्या था हुआ शुरू बधाईयों का सिलसिला। नौ महीने सबको तब स्त्री का संघर्ष दिखा, पुरुष तो बस चहुं ओर मुस्काता दिखा। इसमें कोई संशय नहीं, कि कष्ट मां ने सहा जीवन सृजन के लिए। लेकिन पिता-पति की दशा सबसे छुपी रह गई, सबने दिलासा दिया मां को और खुशी घर आयी। पुरुष की विडंबना भी क्या है जानो अगर, जच्चा बच्चा दोनों की साथ साथ है उसे फ़िकर। पलभर को भी कोई हाथ कंधे पर न रहा, जाने कैसे वो खुद ही खुद संभलता रहा, कशमकश में दिन बीते, दिलासा पत्नी को देता रहा। कन्या जन्म से हुआ अलंकृति, तब जाकर शांत हुआ। खुशियों की जैसे बारिश हो गयी, आंखें नम थी हुई जैसे स्वर्ग की प्राप्ति आज हुयी। स्वपन जैसे आज सरोकार हो गया, एक पिता को बेटी का वरदान मिल गया। छोड़ हर काम बस प्रेम बिटिया का था, उसकी परवरिश को लेकर कभी थकता न था। सारी खुशियां न्योछावर थी आंखों का सुकून था, बेटी की ही खुशी में अब तो संसार था। हुई वो सयानी तो विवाह की सोच होने लगी, ख...

खेल खरा है पैसे का, बाकी सब बकवास

सबको खुश रखकर आप खुद खुश नहीं रह सकते, जैसे खाली गिलास से आप, किसी की प्यास नहीं बुझा सकते। ये मृत्युलोक है यहां आप हर किसी को सही नहीं साबित कर सकते, आप स्वयं खुश रहो, तभी सभी को खुश हो रख सकते ।। पेट में रोटी और आंखों में नींद, तब आप ज्ञान दे सकते हो, खाली पेट तो आप बस एक उसे भरने के जुगाड में रहते हो। दुनिया के अनेक मसलों के सामने, आप इसे नजरंदाज कर सकते हो, लेकिन यकीन मानिए आप इसे कभी भुला नही सकते हो। यहां हर कोई किसी न किसी को समझा रहा, लेकिन ऐसा क्यूं है, जबकि हर कोई तो खुद को, सबसे बड़ा समझदार भी बता  रहा है। तुम नहीं जानते से लेकर, तुम्हे मैं बताता हूं कि बात चल रही है, लेकिन असल में यहां सबकी, किसी न किसी तरह बैंड बज रही है।। अब कहे pari सबको, दिल खोलकर मन की बात, पैसे का है ये ज़माना, कमाते रहो हर कोई इसे दिन रात। बिन इसके तुम्हारी इस जहां में, नहीं होगी कहीं कोई पूछताछ, मक्खन की तो बात छोड़ दो, कोई न देगा पीने खाली छाछ।। Pari ✍️

देवभूमि उत्तराखंड, मेरी जन्मभूमि

मन मेरा है चंचल जैसे, पल पल भटके यहां वहां, ढूंढ रहा हो जैसे हरपल, कोई अपने लिये नया जहाँ। सुकून शान्ति की राह चले, नहीं है कोई एक ठिकाना, नही यह रहता एक जगह, निकले हर दिन ढूंढ नया बहाना। देवभूमी का वासी हूँ मै, जन्म कर्म है देवभूमी, समर्पित जीवन करना है, चाहे कहीं और हो कर्मभूमि। स्वर्ग से सुंदर जगह है, धन्य स्वयं को मै पाता हूं, जब जब कहता दुनिया को, मै देवभूमि का वासी हूं। कण कण में बसते हैं ईश्वर, कदम कदम पर मंदिर मंदिर, हरदम रहती छाया प्रभु की, शीतल मन काया भी सुन्दर। मन आतुर रहता है सबका, दर्शन तीर्थ देवभूमी पल पल हो, जीवन का है सार यहीं सब, प्रभु चरणों में अपना भी बसेरा हो।। सारा जगत भले घूम आओ, लेकिन देवभूमि बिन सब अधूरा है, केदारनाथ बद्रीनाथ देख लिया, समझो सफल जीवन तुम्हारा है। शब्दों में नहीं लिख सकते, ऐसी महिमा धारी देवी चारों धाम की है, स्वयं त्रिदेव विराजे जहां निशदिन, वही देवभूमि हमारी है। आवाहन करता हूं हर पल, आओ घूमो मेरी जन्मभूमि पर, लेकिन रखना स्वच्छ इसे, लगे न कोई दाग आपके आगमन पर। सारा जग है परिवार हमारा, यही मंशा हम सबके मन में है, देवभूमि है सबकी प्यार...

दोस्त, जो चश्मा लगाती है...!

हल्का हल्का मुस्काती है, जब वो मुझसे बतियाती है, कहते कहते रुक जाती है, जाने फिर क्या सोचती है। बातें उसकी खतम न होती, बस जाने क्या वो कहना चाहती है, अरे हां एक बात बताना भूल गया, दोस्त मेरी चश्मा लगाती है। गाल हैं गुलाबी और आंखें शराबी, जुल्फों को खुला ही रखती है, कहते कहते भूल है जाती, फिर थोड़ा सा तब वो इठलाती है। थोड़ी सी वो नटखट है और मन को मेरे बहुत ही भाती है, हां वही मेरी दोस्त, प्यारी सी ....जो चश्मा लगाती है। चलते चलते रुक जाती है, फिर जाने क्यूं पीछे मुड़ जाती है, पसंद है उसको चटपट खाना, किस्से फिर वो सभी सुनाती है। सुबह से लेकर शाम की वो, बड़े ही चाव से मुझको बताती है, हां वो मेरी दोस्त, सही समझे आप...जो चश्मा लगाती है मन की है स्वाणी वो, प्रेम उसका निश्छल, आली जाली नहीं लगाती है, पूर्ण है समर्पण, प्रेम उसका पवित्र, पूर्णता से पहचानी जाती है। पल पल देखूं उसे, निहारूं चारों पहर, आंखों में समा मेरे जाती है, प्रेम की है परिभाषा मेरी वो दोस्त, जो आंखों में चश्मा लगाती है।। Pari✍️