हकीकत बस यही थी....
होंठों पर मुस्कान रखी है, दिल का दर्द छुपा रहा हूँ, खामोशियां सजों रखी है, बस इंतज़ार कर रहा हूँ। यकीनन मेरी कोई बात, सुनी नहीं जायेगी जानता हूँ, बस इसी बात को लेकर, सब सुनते ही जा रहा हूँ। कितनी भी कोशिशें कर लूं, पर तुझे इल्म नहीं होगा, चाहे कोई भी गवाही दे दे, तुझे विश्वास नहीं होगा। सब कुछ जानकर भी मैं, तुझसे अनजान सा बना हूँ, न तुझे कद्र थी न होगी, फिर भी आस किये जा रहा हूँ। हर लम्हा बस बीत रहा है, ख्वाइशें सारी दफन हो चली, कभी थी मुझे भी तमन्ना कोई, सब जैसे स्वाहा हो चली। अब न कोई उम्मीद है, न दिल पर कोई असर होता है, न कोई खुशी अब हंसाती है, न कोई गम अब रुलाता है।। बेशक जहाँ में सब किराएदार है, फिर भी लगाव हो गया था, छोड़कर जाओगे मालूम था, फिर भी तुझसे प्यार हो गया था। तूने तो मुझे कराया था एहसास, कि अनजान है हम तेरे लिये, मैं ही नासमझ निकला, जो उम्मीद लगाये बैठा रहा तेरे लिये।। Pari