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Showing posts from February, 2025

एक मुलाकात सालो बाद

आज फिर मिलने वो हमसे आयी हैं, मिलते ही निगाहें वो फिर शर्मायी हैं मालूम था उसे की हम भी उतने ही बेचैन है आकर पास उसने चुराए फिर हमसे नैन हैं... उसकी चाल में आज भी वही बात थी, सालों बाद भी वो वैसे ही इतरा रही थी। देखकर फिर मुस्कुराई वो पहले की तरह ही, जैसे कह रही हो मैं हो चली अब तो परायी ही। फिर वही सवाल था उसका मेरे से आज, कैसा है बताओ मुझसे मिलकर तुम्हारा मिजाज। उस पगली को अब मैं क्या ही बताता दिल का हाल, देख उसे सालों बाद, कैसे रहा था मैं खुद को संभाल। कैसे हो, क्या करते हो, कौन कौन है साथ तुम्हारे, सवाल थे उसके हमसे वही आज फिर पुराने। मैंने भी बस मुस्करा के कहा सब अच्छा है, कैसे कहता बिन तेरे अब अकेले ही दिन कटता है। फिर कुछ कही उसने अपने दिल की बात हमसे, लगा अभी भी कुछ बाकी रिश्ता है हमारा उससे। वो आखिरी मुलाकात, वो भूली नहीं कहा उसने, भूलकर सब आगे बढ़ जाओ कहा फिर उसने। मैं भी कुछ पल तो ठहर गया था उसी मोड़पर फिर से, लेकिन संभाला खुद को मैंने फिर दूसरी तरफ मुड़के। खत्म हो चुकी उम्मीदों को, आज फिर ज़िंदा कर गयी दूर हूँ लेकिन भुलाया नहीं, बिन कहे वो फिर कह गयी। भीगी पलकों से अलविदा कहा उ...

मेरा प्रेम बस एक तुम....

काश तुमने कोशिश तो की होती, दिल की बात हमसे तो कही होती। मेरा दिल भी था तलबगार तुम्हारा, एक बार मेरी बाँह प्रेम से पकड़ी तो होती.. सच कहूँ तो आज भी हम बस तुम्हारे हैं, जिस्म से दूर लेकिन जहन में तुम्हारे हैं। कोई छूता है तो तकलीफ होती है मानो अगर, जैसे हक है तुम्हारा ही बस इस ज़िन्दगी पर। अब मैं बंदिस में हूँ समाज के बंधन में कैद हूँ, लेकिन दिल मेरा कोई कैद कर पायेगा क्या? मेरे जिस्म को भले पा भी ले कोई सिवा तेरे, मेरी रूह को सिवा तेरे कोई छू पायेगा क्या? चल बस अब मैं नहीं कह सकती अधिक कुछ भी, पलक खुलने और बंद होते ही बस ख्वाइश है तेरी ही। तू इतना समझ ले मेरी बेचैनी को मेरे दिल के चैन, अब ताउम्र बिन तेरे मैं तेरे लिये ही बेचैन... Pari✍️

मेरी कल्पनाओं में..✍️

क्या करे जनाब ये दुनिया है, हर कोई ख्वाइश कहाँ मुकम्मल होती है, किसी को नींद चाहिये सोने के लिए, कोई जागना चाहता है किसी के लिए।।।😊 अक्सर मुस्कुरा देता हूँ मैं, जब जब वो पल याद आता है मुझे, समझा था जिसे दिल के बेहद करीब हमने, उस एक पल में समझ आया था हमारा दायरा हमें.. प्यारी मुस्कान संग आँखों मे काजल, बिना तीर के ही कर देते हैं घायल। यूँ देखना तुम्हारा नजरें झुका कर, इन्हीं अदायों के तो हम हुये हैं कायल.. शांत है बाहर से, मन मे भरी है हलचल, व्यक्त जीवन में, निकाले हमारे लिए कुछ पल, थोड़ा शरारत है थोड़ी है नटखट माना, वो,  लेकिन दिल की साफ, इसलिए तो है बेहद खास क्या भीड़ के होने से तन्हाई मिट जाती है,? सिर्फ धूप आने से मायूसी छट जाती है?? यकीन मानो अगर दिल की सुनने वाला साथ हो, सारी मुश्किलें भी मुस्काते हुए मिट जाती हैं..।। Pari✍🏻 इस जहाँ में एक दस्तूर है अगर मानो तो, चार दिन चालाकी चरम पर चलती है। कोई भी इतना नासमझ नहीं है समझ लेना, ठोकर एक ही पत्थर बार बार नहीं खायी जाती है..! न जाने कब वक़्त फिसल गया रेत की तरह, वो मिले बात हुयी और फिर बिछड़े किस तरह। यकीनन जीवन के किसी मोड़पर वो मिल...