एक मुलाकात सालो बाद
आज फिर मिलने वो हमसे आयी हैं, मिलते ही निगाहें वो फिर शर्मायी हैं मालूम था उसे की हम भी उतने ही बेचैन है आकर पास उसने चुराए फिर हमसे नैन हैं... उसकी चाल में आज भी वही बात थी, सालों बाद भी वो वैसे ही इतरा रही थी। देखकर फिर मुस्कुराई वो पहले की तरह ही, जैसे कह रही हो मैं हो चली अब तो परायी ही। फिर वही सवाल था उसका मेरे से आज, कैसा है बताओ मुझसे मिलकर तुम्हारा मिजाज। उस पगली को अब मैं क्या ही बताता दिल का हाल, देख उसे सालों बाद, कैसे रहा था मैं खुद को संभाल। कैसे हो, क्या करते हो, कौन कौन है साथ तुम्हारे, सवाल थे उसके हमसे वही आज फिर पुराने। मैंने भी बस मुस्करा के कहा सब अच्छा है, कैसे कहता बिन तेरे अब अकेले ही दिन कटता है। फिर कुछ कही उसने अपने दिल की बात हमसे, लगा अभी भी कुछ बाकी रिश्ता है हमारा उससे। वो आखिरी मुलाकात, वो भूली नहीं कहा उसने, भूलकर सब आगे बढ़ जाओ कहा फिर उसने। मैं भी कुछ पल तो ठहर गया था उसी मोड़पर फिर से, लेकिन संभाला खुद को मैंने फिर दूसरी तरफ मुड़के। खत्म हो चुकी उम्मीदों को, आज फिर ज़िंदा कर गयी दूर हूँ लेकिन भुलाया नहीं, बिन कहे वो फिर कह गयी। भीगी पलकों से अलविदा कहा उ...