Posts

Showing posts from December, 2021

बस यूहीं ख्याल में

न जाने कौन सी वो बात है, न जाने कौन से वो जज्बात है... किताब खुली फिर भी लब्ज चुप है, न जाने कौन सी ये शब्दावली है... एक पल भी गुजरा तो क्या, एक नया पल वो भी दे गया.... मैं समझने में गलती कर बैठा. वो तो इशारे भर में बहुत कुछ कह गया... बेजुबान सा था मैं सामने उसके, वो जैसे कोई ज्वालामुखी हो.. मेरी सारी कोशिश नाकाम रही... जैसे मैं कातिल वो वकील हो... न लब्ज चाहिए कहने को, बस निगाहें सब बयां कर जाती है.. जो देख लू तुझे मैं नजर भर को.. तेरी हर बात जैसे मुझे अपनी लगती है.. जुबां कुछ कह दे तो भुलाना मुमकीन है, मेरी कलम के शब्दों को मिटाना न मुमकिन है.. मैं कह भी दूं झूठ दुनियां से शायद कभी, तुझको झूठ लिखना मेरी कलम का नामुमकिन है.. Pari

तुझसे है मोहब्ब्त

 मैं लिखता रहा तुझे, जैसे कोई खिलता गुलाब, लेकिन पल पल लाती रही, तुम जीवन मे सैलाब। मैं करता रहता था तेरा इंतज़ार उसी मोड़ पर, तुम हरपल ही बदला करती थी, राह अपनी जनाब।। याद मुझे आज भी, रखे तेरे वो किताबों में गुलाब, रात रात भर जगना और खुली आँखों के वो ख्वाब। तेरी चाल निराली थी, होठों की वो भोली मुस्कान, हर अदा अनोखी थी और आंखें जैसे कोई शराब।। वो दिन ही थे मेरे सभी, आज मेरा न मेरा रहा, मैं हूँ खोया कहीं अब ऐसे, जैसे कोई वजूद न रहा। हरपल है अब बस तेरा, मुझमे मेरा न कुछ बाकी रहा, तू ही है मेरी रात और दिन, न कोई सूरज न चाँद अब रहा। तुझमें खोकर ही रहता हूं अब, जैसे मछली को पानी हो मिला, तेरी हर बात का है यकीं मुझे, न कोई तुझसे शिकवा और गिला। मोहब्बत में तेरी हूँ जलता दिया, बिन तेरे जैसे हो अँधेरा भरा, अब भी अगर मुझसे है तू खफा, फिर जहां में है क्या ही रखा.. Pari

कहानी अधूरी सी

एक किस्सा था जो कहानी बन न सका, अरमानों को जैसे पूरा होने का मौका न मिला। मोहब्बत बहुत थी उसको भी हमसे यकीनन, न बताने और न जताने का मौका मिल सका!! कोई दूर रहकर भी पास हो गया, न चाहकर भी ज़िन्दगी का हिस्सा हो गया। जब जब वो हुआ दूर मुझसे कभी, जैसे कस्तियों का कहीं साहिल खो गया.. कोई अपना है कहीं दूर किसी शहर में, ख्वाबों में आता है वो सुबह दोपहर में, हर किसी के नसीब में उस जैसा नहीं होता, वो तो मिलता है किसी किसी को ईश्वर की मेहर में... ©®Pari