इष्टदेव महिमा
।।देवभूमि वंदना: हमारे इष्ट-देव।। देवभूमि की श्रृंखलाओं से, गूँजे इष्टदेवों का जयकारा, धन्य हुई पावन यह धरती, धन्य हुआ यह जग सारा। डांडा नागराज विराज रहे यहां, सेम नागराज की माया, फन फैलाए रक्षा करते, करते सब पर शीतल छाया।। नरसिंह देवता जोशीमठ में, खम्ब फाड़ कर प्रकटे हैं, भैरव बाबा लाठ लिए, भक्तों की रक्षा करते हैं। गाँव-गाँव के भूम्याल तुम, क्षेत्रपाल रखवाले हो, संकट से हमें उबारने वाले, तुम भक्तवत्सल बड़े निराले हो। ज्वालपा माँ की ज्योति निर्मल, मां चंद्रबदनी कल्याण करे, राजराजेश्वरी माँ जगदम्बे, भक्तों के सब भंडार भरे। सिद्धबली हनुमान विराजे, खोह नदी के पावन तट, दीवा की ऊँची चोटी से, माँ काट रही सब माया-जंजाल। कंडोलिया ठाकुर कृपा बरसाएं, वन-पर्वत के राजा हैं, क्यूंकालेश्वर महादेव के दर पर, बजते शंख और बाजा हैं। तकड़ेश्वर की महिमा न्यारी, बिन्सर महादेव निराले, थलीसैंण से चौखुटिया तक, शिव ही सबको पालने वाले। अगणित रूप तुम्हारे ईष्ट, अगणित तुम्हारी शक्ति है, देवभूमि के कण-कण में, बसी तुम्हारी भक्ति है। हे पहाड़ी देवी-देवताओं, अपना आशीर्वाद बनाए रखना, इस पावन धरती की गरिमा,...