Posts

Showing posts from July, 2019

ख्याल ख्याल में 14

यूहीं तन्हा सा महसूस होने लगा तुझसे दूर होकर, फिर मन बनाया और चल पड़ा तुझसे मुलाकात को मैं। युहीं तुम चुप्पी बनाये बैठे हो, शायद तुम्हे इसका अंजाम मालूम नहीँ, बयाँ करने से मिटते हैं गीले शिकवे, मौन रहकर सिर्फ दूरियां बढ़ती हैं। इश्क़ जो है तुमसे तो जैसे कोई गुनाह हो गया, हर बार तुम बेकसूर और मैं गुनहगार हो गया। इसी तरह तुम बस इजहारे मोहब्बत किया करो, लुट भी गये तेरे इश्क़ में तो शिकवा नही होगा। कुछ बात है होठों में दबी सी, आँखे जैसे करना चाहे कुछ बयाँ, नजाकत कुछ अलग सी अदाओं में, मिजाज फिर भी तेरा खुशनुमा.. दिन भले कैसे भी कट जाए, रातें बस तेरी यादों से दबी है, मुस्कान चेहरे पर ला देता है हर कोई, ये आंखें तो बस तेरी कमी से भरी हैं. मुस्कान जो चेहरे पर है, यकिनन तेरे ही ख्याल से है। यूँही तो तनहाई पसन्द नहीं, ये तो तेरे ख्यालों में खोने की चाह है। कुदरत के करिश्में से तुम आकर मेरे सामने बैठ गयी, फिर नजरें चुराकर तेरा देखना सारी दुनिया भुला गया। वो तेरी शराबी आँखे, घुंगराली लटायें, और गुलाबी गाल, संग मुस्कान होंठों की कर गयी अनेकों सवाल। नयनों की भाषा नयन ही जाने,...

मेरी कविता मेरे शब्द

मैं यूहीं तो शब्द संजोता नही था, शायद कोई किताब होना बाकी थी, वक्त बेवक्त कुछ लम्हें लिखता था, फिर यादें जो अताह बनानी थी। कुछ जज्बातों को उतारा है मैंने, कुछ को यूहीं भुलाना सही समझा, जो दे दिलो को सुकूँ संजो दिया, बेचैनी को बस स्वयं तक सीमित कर दिया। आये फिर लम्हें कुछ ऐसे भी, मन मेरा भी हुआ प्रफुल्लित, आशाओं का ज्वार उठा, देख मेरा मन हुआ प्रशनचित। कोई सुन्दर सा सपना फिर, मेरी भी निंद उड़ा गया, कुछ अच्छा लगा मुझे भी फिर ,जैसे जीवन का रुख गया। कुछ लम्हों को संजोने की कोशिश थी, कुछ अनचाहे लम्हें मिल गये, दिल की चाहत पूरी न हुयी, कुछ अपने न जाने कहाँ खो गये। बेकल ही होती है पूरी ख्वाहिशें, बाकी सब सपना ही बना रहता है, पल पल समय गुजरा जैसे रेत हाथों से, बस काश बाकी बचा रहता है। मेरी हर पंक्ति का हर शब्द मेरी कहानी होगा, ये जरूरी तो नही होगा, लेकिन मेरे अनुभव मेरी कल्पना को जरूर कविता का रूप देगा।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything