ख्याल ख्याल में 14
यूहीं तन्हा सा महसूस होने लगा तुझसे दूर होकर, फिर मन बनाया और चल पड़ा तुझसे मुलाकात को मैं। युहीं तुम चुप्पी बनाये बैठे हो, शायद तुम्हे इसका अंजाम मालूम नहीँ, बयाँ करने से मिटते हैं गीले शिकवे, मौन रहकर सिर्फ दूरियां बढ़ती हैं। इश्क़ जो है तुमसे तो जैसे कोई गुनाह हो गया, हर बार तुम बेकसूर और मैं गुनहगार हो गया। इसी तरह तुम बस इजहारे मोहब्बत किया करो, लुट भी गये तेरे इश्क़ में तो शिकवा नही होगा। कुछ बात है होठों में दबी सी, आँखे जैसे करना चाहे कुछ बयाँ, नजाकत कुछ अलग सी अदाओं में, मिजाज फिर भी तेरा खुशनुमा.. दिन भले कैसे भी कट जाए, रातें बस तेरी यादों से दबी है, मुस्कान चेहरे पर ला देता है हर कोई, ये आंखें तो बस तेरी कमी से भरी हैं. मुस्कान जो चेहरे पर है, यकिनन तेरे ही ख्याल से है। यूँही तो तनहाई पसन्द नहीं, ये तो तेरे ख्यालों में खोने की चाह है। कुदरत के करिश्में से तुम आकर मेरे सामने बैठ गयी, फिर नजरें चुराकर तेरा देखना सारी दुनिया भुला गया। वो तेरी शराबी आँखे, घुंगराली लटायें, और गुलाबी गाल, संग मुस्कान होंठों की कर गयी अनेकों सवाल। नयनों की भाषा नयन ही जाने,...