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ख्याल ख्याल में 13

शब्दों का प्रयोग किया जिसने, शब्दो की मर्यादा रखकर। इंसान वही है जीवित जग में, व्यंग्य करे जो अपनी मर्यादा में रहकर।। मेरी मासूमियत को मेरी कमजोरी समझ गए वो, वादा जीने मरने का कर यूहीं तनहा छोड़ गए वो। तोड़ दो खामोशियों का सिलसिला अब तुम भी, लो अब मान गये हम और हो चले अब तुम्हारे। खता होउसी शख्स को मेरे हिसाब से, दिल मे छुपे होंगे राज जिसके बेहिसाब से। चिलचिलाती धूप में भी आराम नही करता, दिन हो या रात भरसक प्रयास है करता। थोड़ा संभल कर शब्द चुनना यारो तुम, तुझे पालने को कोई हर कष्ट है सहता।। मैं लिखूं तुझे अपनी गजलों मे, या फिर तेरा जिक्र शायरी में हो मेरी। सब बेवजह का ही फलसफा होगा, अगर तेरा दिल न इससे वाकिफ होगा।। क्यों न जाने रह रहकर तुम मुझे याद आती हो, थोड़ा सुकूँ और बेचैनी बेहिसाब दे जाती हो। चोट मुझे जब लगे कभी, तो दर्द तुम्हीं महसूस करती हो। मेरी हर कामयाबी पर मुझसे ज्यादा, सिर्फ मेरी माँ तुम खुश होती हो।। कुछ खैरियत खुद की भी पूछ ले ऐ ज़िंदगी, बरसों से चली जा रही है तू, बिना कोई सवाल किये। हरे भरे खेतों कों कर बंजर, मैं सीमेंट में पौधे रोपने लगा हूँ,...