परिकल्पना-2
किसी ने किया फिर आज एक सवाल फिर से, क्यों रखते हो दिल मे जब नाता टूट गया उससे। अब क्या समझायें उन्हें हालात हम अपनी, कि धड़कन ही चलती है जब याद करते हैं हम उसे।। pari ये सुहाना मौसम और संग आपके दीदार, जैसे पतझड़ के बाद आये कोई बहार.. पलक खुलते ही दिख जायें ये स्वाणी आंखे, फिर कैसे कोई न करे इनसे भला प्यार... Pari खूबसूरती के संग बेहतरीन सीरत, आप जैसे जहां की सबसे सुहानी मूरत। बन जाता होगा दिन उसका हर रोज ही, जिसे देखने को मिले रोज ये आपकी सूरत... ये प्यारी नशीली आँखें, ये लाल सुर्ख अधर, ये मुस्कान होठों की, ये दीदार पहली पहर। यूँ तो सुबह हो ही जाती है सूरज के आने से, लेकिन आपको देख ही जीवन में होती है शहर।✍️ मौसम ने मिजाज बदला है, शुष्क से सुहाना हो चला। आपने भी अदायें बदल ली, सुंदर से अतिसुन्दर हो गये..। Pari✍️