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परिकल्पना-2

किसी ने किया फिर आज एक सवाल फिर से, क्यों रखते हो दिल मे जब नाता टूट गया उससे। अब क्या समझायें उन्हें हालात हम अपनी, कि धड़कन ही चलती है जब याद करते हैं हम उसे।। pari ये सुहाना मौसम और संग आपके दीदार, जैसे पतझड़ के बाद आये कोई बहार.. पलक खुलते ही दिख जायें ये स्वाणी आंखे, फिर कैसे कोई न करे इनसे भला प्यार... Pari खूबसूरती के संग बेहतरीन सीरत, आप जैसे जहां की सबसे सुहानी मूरत। बन जाता होगा दिन उसका हर रोज ही, जिसे देखने को मिले रोज ये आपकी सूरत... ये प्यारी नशीली आँखें, ये लाल सुर्ख अधर, ये मुस्कान होठों की, ये दीदार पहली पहर। यूँ तो सुबह हो ही जाती है सूरज के आने से, लेकिन आपको देख ही जीवन में होती है शहर।✍️ मौसम ने मिजाज बदला है, शुष्क से सुहाना हो चला। आपने भी अदायें बदल ली, सुंदर से अतिसुन्दर हो गये..। Pari✍️

भारत। देश

 हिमालय जिसका शीश मुकुट चरणों में है विशाल हिन्द अलग अलग है बोलीभाषा अलग अलग है धर्म क्षेत्र ऐसा ही एक भूखंड धरा पर भारत जिसका नाम प्रसिद्ध अनेक संस्कृति का मेल है, अनेक धर्मों का है संगम स्थल वीरों की है कर्मस्थली भगतसिंह, आज़ाद, बोस का जन्मस्थान ऐसा एक भूखंड धरा पर भारत देश है जिसका नाम। विश्वगुरु कहलाता हैं ऋषिमुनियों की तपस्थली। योग से निरोग जहाँ को बनाता बसते हैं जहाँ चारों धाम। ऐसा एक भूखंड धरा पर भारत देश है जिसका नाम। Pari✍️

परिकल्पना✍️✍️

न जाने कैसी ये दिल की लगी है तुझसे, अभी मुलाकात हुयी और अभी तुम याद आने लगे। पल भर को तुम ओझल हुये नजरों से, जैसे आंखें दीदार को तरसने सी लगी। वो मुलाकात अधूरी ही लगती है आज भी, जब तुम अधरों पर बात दबा के बैठे थे। आँखों ने तो कहा था फिर भी बहुत कुछ। होठों तो तुमने सिले रहने दिया था तब। मौसम का मिजाज बदला है जो वो भी कुछ बदले से नजर आ रहे। दिल मे है उन्हें देखने की चाहत, वो चांद की तरह छिपे जा रहे pari सिर्फ विवाह बंधन में बंधने से साथ रह जाना संभव नहीं होता, प्रेम की अमृतवर्षा है जो दो व्यक्तियों को जीवनपर्यन्त साथ जोड़े रखती है! Pari हर सोची हुयी बात सच नहीं होती, ख्यालों ख्यालों में मुलाकात नहीं होती। भले हर वक़्त एक चेहरा पास रहता हो तुम्हारे, बिन कहे दिल की बात मोहब्बत मुकम्मल नहीं होती...! Pari✍️