हम तुम फिर से

यूहीं आज बैठा था जो मैं तन्हा फिर से,
चली आयी तेरी यादों की वो लहर फिर से।
ठहर ठहर फिर हिचकियों का सिलसिला शुरू हुआ,
जैसे याद हो किया तुमने और मैं मुस्कुरा फिर दिया।।

क्यूँ न जाने आज भी तेरी खुशबू जहन में बाकी है,
तुम पास न सही लेकिन यादों की सिहन बाकी है।
वक्त बेवक्त छलक ही जाते हैं नीर आँखों से अक्सर,
तेरी बिछड़न की वो रात अभी भी बाकी है।।

कोई किस्सा न बना और न ही कोई कहानी लिख पाया,
फिर भी तुम्हें वर्षों बाद भी दिल से न निकाल पाया।
न जाने कैसा रिश्ता था जो लाख चाहकर भी नहीं टूटता,
कहीँ भी रहूँ यारा लेकिन तेरी यादों का कारवाँ नही छूटता।।

मन में कोई ख्वाइश उठती है आज भी अगर कभी,
शुरुआत फिर तेरी चाहत से होती है फिर सभी।
माना कि मुकम्मल नहीं होती है चाहतें जहां में अक्सर,
देखो नादान दिल तुम्हें ही मांगे ख्वाइश में एक बार फिर।।

मेरी हर कोशिश हर वक्त बेबुनियाद ही साबित होती रही,
जब जब तुझसे दूर जाने की मैंने चाह मन मे भरी।
शायद ये बँधन तुमसे कई कई जन्मों से चलता आ रहा होगा,
इसलिए हर बार मेरे जीवन का हिस्सा तुम्हें बना रहा होगा।।
Pari

© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything



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