अब न कोई ख्वाब सजाएंगे
ख्वाब सजाए थे मैंने भी, लेकिन हर एक चकनाचूर हुआ, जिस जिस को दिल में बसाया, हर एक मुझसे दूर हुआ। खुशियों की थाल सजाकर, कोशिश की थी परोसने की, ठोकर मार मुझे दूर कर दिया, कोशिश रही मुझे गिराने की।। हर एक बंधन टूट गया, वह मेरा मुझसे रूठ गया, लाख कोशिशों के बाद भी, जन्मों का रिश्ता टूट गया। पल पल कोशिश थी जिसके संग, सपनों की दुनिया बसाने की, राहों में काटें बिछा, फिर कोशिश की उसने मुझे मिटाने की। मेरा अपना गुरूर भी टूट गया, जब सबसे अजीज छूट गया, क्या दिन क्या रात भी अब तो, जैसे गमों से रिश्ता जुड़ गया। मैं भला अब क्या ही करता, जब ठान ली उसने दूरी बनाने की, परत दर परत तोड़ा मुझको, थी कोशिश शायद मुझे राख बनाने की। चलो तुमने अगर कह ही दिया, हमने भी भ्रम पालना छोड़ दिया, सांसों की डोर तोड़कर, दुनिया को अलविदा बोल ही दिया। अब न रहेगी शिकायत तुम्हें, न जरूरत पड़ेगी हमसे मिलने की, जाओ अब आजाद हुए तुम, जी लेना ज़िंदगी अपनी मर्जी की। आखिर में बस एक सवाल रहेगा, जरूरत नहीं है उसे भी बुझाने की। क्या कमियां थी मुझमें ऐसी, उम्मीद नहीं थी जिन्हें मिटाने की। जाओ तुमको एक सवाल दिया है, जरूरत नहीं है जवाब बत...