ख्याल ख्याल में 8

चली है फिर बयार आज वही पहले वाली खुश्बू संग,
क्या कोई सूखा पेड़ फिर हरा हुआ होगा क्या...

सतह पर पहुँच कर तो देखो, फिर गहराई का एहसास होगा,
यूँ किनारे बैठ सागर की गहराई नहीं नापी जाती।

जी आया हूँ कुछ पल ज़िंदगी के अपनी मन मुराद से,
न जाने फिर वो लम्हे फिर मिले न मिले।

थोड़ा सा धुँआ जो फैला चारो तरफ गलतफहमी का,
हर रिश्ता न जाने क्यों धुंधला सा हो गया।

कुछ यादें है अतीत की बसी, कुछ कहना चाहते है ये बंजर मकान भी,
कुछ याद न आये तस्वीर से , तो देख आना अपना गांव घर एक बार फिर..।

न कर कोई फैसला जल्दबाजी में, थोड़ा सब्र कर फैसला करने से पहले,
मायने हर भाव में होते हैं गौर करना, ग्लास खाली है या भरा सिर्फ नजरिया भर है..

कुछ लब्ज जो कह दिए मैंने सच्चाई संग तेरे लिये,
आज अनजाने हो चले जो अजीज़ थे तुम्हें कल हम...?

निकल जाओ छोड़ सपनो को चादर में ही अब,
हल्की हल्की भोर आ चली है दीदार को तुम्हारे....!

यूँ तो ये मंजर है जवानी का, हर तरफ सिर्फ मोहब्बत ही नजर आती है,
कैसे कह दूं कि तुम ठीक हो, बेशर्मी का आलम भी तो देखो अपना।

सही है आज तुमने सब साफ तो कर दिया,
अब कोई तकलीफ नहीं होगी वफा करने में।

रात ढल चुकी है चाँद भी चला गया, फिर क्यों तुम आती नही,
भोर जो हुयी ऐसी सुहानी आज, सिर्फ तेरा इंतजार बाकी है।

ख्याल दिल से निकाल दो हमारा अब तुम भी जनाब,
तुम भी पराये और हम भी तनहा हो चले अब।

सपनो में रहना छोड़ चले, अब हकीकत से गुफ्तगू करते हैं,
कुछ दिल में रखना छोड़ चले हम, सब लब्जो में बयां कर देते हैं।
Pari

© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything

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