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Showing posts from December, 2020

तुमसे है जिंदगी

 माना कि भावनाओं में बहना ठीक नहीं, लेकिन बिना इनके जीना भी मुमकिन नही। सोचा तो अक्सर मैं भी करता हूँ इस बारे में, कि न लिखूँ कभी भावनाओं को सामने रख के।। मैंने भी की मोहब्बत बेइंतहा किसी एक से, कद्र उसी को सबसे कम हुयी मेरे प्रेम से। सब कुछ नजरअंदाज कर जिसे लगाया गले से, वही बांह निकली मेरे लिये कमजोर सबसे।। राहत की चाहत में आँख बंद कर भरोसा कर लिया, मैंने तो ताउम्र का जैसे सुख एक साथ पा लिया। अकाबक्की में फैसले कर लेता तो ठीक था शायद, सोच समझकर जैसे मैंने कुछ पाकर भी खो लिया।। मैं तो बस करता रहूँगा तुमसे वफ़ा एकतरफा ही सही, सितम भी बिना उफ सह लूँगा मैं बेवजह ही। मेरी हर प्रार्थना में तेरी ख़ुशी ही बरकरार रहेगी, तू मुस्कुरा ले बस चाहे कीमत मेरी जान भी होगी। ©®pari

बेजान हूँ तुम बिन

बामुश्किल से मुस्कुराने की कोशिश करता हूँ, कुछ पलों के लिये खुश होने की कोशिश करता हूँ। आता है वही दौर अश्रुओं का फिर लौटकर, दिलाने मुझे मेरी किश्मत का गम याद फिर से। कोशिश तो बहुत की हर किसी का खास होने की, दबाकर हर गम अपना साथ सबके मुस्कुराने की। लेकिन मैं भी लड़ता कब तक अपने नसीब से, मांगकर जो लाया था ज़िन्दगी सिर्फ रुलाने की।। सब रिस्तों को मैं अकेला तवज्जो देता रहा बस, सबके होठों पर मुस्कुराहट लाने को लड़ता रहा बस। मेरा अपना वजूद मिट गया, मैं बिसरा सा दिया गया, जैसे मूरत हूँ मैं भी कोई बनी पुराने पाषाण की।। मेरा गर्व मेरा अहम था जो वो भी रुठ गया, मेरी मुस्कुराहट ही मुझे आँशु थमा गयी अब तो, अब तो बिन एहसास जैसे बेजान हो गया हूँ, जान है शरीर में लेकिन भावनाओं से बेजान हूँ।। Pari