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राष्ट्रहित सर्वोपरि

विश्वगुरू कहलवाते थे कल तक, आज बेवकूफ नजर आते हैं, बिना सोच समझ कर हम भी देखो, भेड़ चाल सी चलते जाते हैं। कुछ असामाजिक मिश्रण मिल गये, और हम भी उसमे घुलने लगे, सालों की अहिंसक परंपरा छोड़, हिसंक न जाने क्यों हम होने लगे। खुद पर अब बिस्वाश नहीं है, दूजे की बुद्धि से सोचने लगे, सवाल पूछते फिर रहें हैं, पर सवाल खुद नही हम समझ रहे, मैंने भी खुद से एक सवाल किया, तुम्हें भी समझ आये तो बतलाना, खुद के होने की मुझे खबर नहीं, तो क्या ठीक नही है मर जाना।। राह तो मुश्किल होगी ही, सच की राह जो चुन ली है, राक्षस उपद्रव करेंगे ही, यज्ञ की अगर तुमने ठानी है। फिर भी तुम निडर बढ़े चलो, झूठ से प्रदा उठने वाला है, कुछ संहार होने जरूरी है, अगर रामराज तुम्हे लाना है।। चंद जयचंदों के होने से, देश की आभा मिट सकती नहीं, देशविरोधी नारों से अब, देशभक्तों की गिनती घटती नही। मिलजुल कर हम साथ हैं सब, बस थोड़ा संयम रखना बाकी है, भूत पिचास सब भागेंगे अब, पंचजन्य की हुंकार आनी बाकी है। मेरा प्रयास है तुन्हें जगाना, तथ्यों संग सच को दिखलाना, पहले जानो, बूझो, फिर तोलो, तब जाकर तुम निर्णय करलो। सही दिश...

जीवन वर्दी का

न कोई फिक्र न कोई चिंता मन मे मेंरे घर करती, मेरी रक्षा में हर पल एक वर्दी जो तत्पर है रहती। बड़े सुकूँ से जीवन जीते दिन रात की हर पहर में, मेरी रक्षा में खड़ी है सोच, हर वक्त एक वर्दी शहर में।। बेफिक्र निकलता हूँ घर से, निशदिन निडर होकर जब भी, वजह तुम ही हो सच कहता हूँ, होता नहीं मुझे डर कभी। रहते हो अटल खड़े तुम, कड़ी धूप, वर्षा या फिर हो सर्दी, आसान इसे तुम मत आँकना, यूहीं पहन लो जो तुम वर्दी।। अनन्य संकट हो चाहे या कोई कष्ट तुम्हें घर कर जाये, सीना ताने फिर भी आगे आये वही तो हो तुम वर्दी वाले। निज स्वार्थ से पहले, निस्वार्थ सेवा का मन भाव जो रखते हैं, वही मानव तो निश्छल होकर सेवा मे वर्दी पहनते है।। ऐसा जीवन ऐसी मंशा प्रत्येक मानव में अगर घर कर जाये, जन जन में खुशहाली और देश स्वतः खुशहाल हो जाये। मेरी भी एक कोशिश होगी, सर्वजन हिताय सोच रखूँ, नमन करूँ इस वर्दी को, जीवन मे सब को मुस्कान दे पाऊँ।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

हम तुम फिर से

यूहीं आज बैठा था जो मैं तन्हा फिर से, चली आयी तेरी यादों की वो लहर फिर से। ठहर ठहर फिर हिचकियों का सिलसिला शुरू हुआ, जैसे याद हो किया तुमने और मैं मुस्कुरा फिर दिया।। क्यूँ न जाने आज भी तेरी खुशबू जहन में बाकी है, तुम पास न सही लेकिन यादों की सिहन बाकी है। वक्त बेवक्त छलक ही जाते हैं नीर आँखों से अक्सर, तेरी बिछड़न की वो रात अभी भी बाकी है।। कोई किस्सा न बना और न ही कोई कहानी लिख पाया, फिर भी तुम्हें वर्षों बाद भी दिल से न निकाल पाया। न जाने कैसा रिश्ता था जो लाख चाहकर भी नहीं टूटता, कहीँ भी रहूँ यारा लेकिन तेरी यादों का कारवाँ नही छूटता।। मन में कोई ख्वाइश उठती है आज भी अगर कभी, शुरुआत फिर तेरी चाहत से होती है फिर सभी। माना कि मुकम्मल नहीं होती है चाहतें जहां में अक्सर, देखो नादान दिल तुम्हें ही मांगे ख्वाइश में एक बार फिर।। मेरी हर कोशिश हर वक्त बेबुनियाद ही साबित होती रही, जब जब तुझसे दूर जाने की मैंने चाह मन मे भरी। शायद ये बँधन तुमसे कई कई जन्मों से चलता आ रहा होगा, इसलिए हर बार मेरे जीवन का हिस्सा तुम्हें बना रहा होगा।। Pari ©   ® Par...