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Showing posts from May, 2025

ख्यालों की ओट से

 खुशियों का सावन भी तुम हो  ये चमचमाता शहर ये जगमगाती मिनारें, फिर भी जीवन है जैसे सड़क के किनारे। तुम खुश रहो इन चकाचौंध के शहर में, मुझे छोड़ आओ मेरे गाँव की सहर में.. शहर उसका था लोग भी उसके थे, हम तो बस एक मुसाफिर भर थे। न जाने कैसे संभले हम जानते ही नहीं,  वरना तूफान जिंदगी में अपने भी बहुत थे।  मुस्कुराता चेहरा तेरा जैसे कोई खिलता गुलाब है, खूबसूरत ये निगाहें जैसे आने वाला कोई सैलाब है अधरों से गिरते हैं शब्द रूपी पुष्प ऐसे ये तेरे, जैसे खिलने वाला हो कोई गुलिस्तां शहर में मेरे।  ख्वाइशों के शहर को बस ख्वाइशों में रहने दो,   ख्यालों में है वो अगर तो ख्यालों में रहने दो।   मुद्दतों के बाद मिले हो आज हमशे  अधरों को सिले और नयनों को कहने दो....  उसके नयन कितने खूबसूरत थे, ये बयां करने को लब्ज़ नहीं मिलते, बस इतना ही कह सकता हूं, कि ये जब जब मिले, हम वहीं ठहर गए.. Pari ✍️ 

अब कोई संवेदना नहीं चाहिए

अब हमें न श्रद्धांजलि और न संवेदना चाहिये, सिर्फ कायरों के कटे हुये सिर चाहिये, शान्ति चाहने वाला कृष्ण नहीं, रक्तबीज का खून पीने वाली महाकाली चाहिये.. नहीं अब कोई वार्ता कोई संवाद चाहिये, दुश्मनों के दिलों में परशुराम का खौफ चाहिए। अब न कोई बहाना न कोई सवाल जवाब चाहिये, निर्दोष हिंदुओ के लिये बस एकतरफ़ा इंसाफ चाहिए। सिर्फ सरकार की नहीं हमारी भी ज़िम्मेदारी है, क्योंकि देश विकास में हमारी भी भागीदारी है। देश के दुश्मन आक्रांताओं से देश को बचाना है, देशहित-जनहित में साथ सरकार का निभाना है।। Pari✍️

ख्वाइशों का शहर

 कुछ बातें बस एहसास तक सीमित होती है, होंठ ख़ामोश रहते हैं, आंखे बयाँ करती है..! आज सालों बाद दिल खोलकर उसने कुछ कहा, जैसे अटका था सैलाब आज हो फिर बहा। हर बात आज दिल की जुबां पर आ गयी, वो तब भी हमारी थी आज भी है.  बस कबूल कर गई ।      देखकर हम तुम्हे बस देखते रह जाते हैं, सोचते हैं ये नूर तुमने पाया कहां से है। काश कोई ख्वाइश हो पूरी अगर आज भी, बस कुछ पलों के लिए तुम पास आ जाओ अभी। तेरी आंखें कितनी खूबसूरत है ये बयाँ करने को मुझे लब्ज नहीं मिलते। बस इतना ही कह सकता हूँ तुमसे, कि जब जब देखता हूं बस देखते रह जाता हूं..। क्या कभी तुमने कुछ एहसास किया है, किसी अनजाने चेहरे से प्यार किया है? अक्सर जो खास था तुम्हारे लिए जीवन मे, उस अनकही मोहब्बत को दूर महसूस किया है? ज़िन्दगी ने न जाने क्यूँ ऐसा मजबूर किया है, खुद ही खुद को खुद की मोहब्बत से दूर किया है। वो रहती है पल पल हर पल मेरे साथ यकीनन, मेरा दिल उसके पास है सिर्फ कुदरत ने जिस्म दूर किया।। Pari ✍️