मोहब्बत की राह आसान नहीं..!
मोहब्बत अगर कर ही ली है, फिर हर अंजाम को सहना पड़ेगा, मिल गया साथ तो फिर क्या, मगर तैयार मात को भी रहना पड़ेगा। हर युग में विरह की कहानी है, उसको भी अवश्य ही पढ़ना होगा, प्रेम अगर कृष्ण से करोगे, विष मीरा सा एक रोज पीना पड़ेगा। समय हर बार नया मोड लेगा, पास होकर भी प्रेमी से दूर रहोगे, कर के हर बात मन के उसकी, इल्जाम बेवफाई का भी सहोगे। मोहब्बत नाम है त्याग का, त्यागकर ही वो तुम्हे अपनाएगा, अगर मिल गई खोट जरा सी भी, इश्क फिर तार तार हो जाएगा।। तनहाई में वो कबूल कर ही लेंगे, तुम्हें भीड़ में साथ ढूंढना होगा, थाम जो लोगे एक बार हाथ उसका, फिर ताउम्र निभाना पड़ेगा। ये तो दरिया है आग का pari, डूबकर ही पार करना होगा, और आ गई घड़ी आखिरी अगर, हँस के उसको भी गले लगाना पड़ेगा।। मोहब्बत मुकम्मल होगी जरूरी नहीं, दायरा अपना पहचानना होगा, सब्र से काम लेना मेरे यार तुम, आशुओं को तनहाई में बहाना पड़ेगा। ज़ख्म अनेक मिलेंगे इस राह में, दर्द को दवा समझ पीना ही होगा, और ज़ख्मों की नुमाइश न करना, ये दर्द तुझे सिर्फ अकेले ही सहना पड़ेगा।। चोट दिल पर खाई है तो असर कलम में भी दिखेगा, ज़ख्म शरीर के भर जाएंगे ले...