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नवंबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हमरू अधिकार, चकबंदी अबकी बार

नव युग का निर्माण करो और मिलकर फिर हामी भरो, आओ सारे मिलकर आज, चकबंदी का आवाहन करो। खुलकर आओ घर से निकल बहार, और नारा एक ज़ोर से दो, खेतों में अब ना हो दूरी, माँग हमारी चकबंदी है जरूरी। धुँए का जीवन है जीने को, क्यो तुम आज मजबूर हुये, कौन है जिसने जीवन मे हमारे, संग हवा जहर है भरे। क्योँ हर बच्चा हमारा आज, निकलता है मास्क के साथ बाहर, करो खुद से एक प्रश्न दिदो, कौन है इसके लिए ज़िम्मेदार।। शिक्षा रोजगार का करके बहाना, छोड़ चले हम अपना घर ठिकाना, जीवन स्तर और अधिक गिर रहा, उडयारो में हो रहा है रहना। खेल हो या शिक्षा विशेष, अव्वल अभी भी ग्रामीण आ रहे, फिर किस जिद्द की खातिर, स्वर्ग छोड़ हम शहर जा रहे।। मेरी सब से एक है गुजारिश, खुद से पहले अपने भविष्य का सोचना, राह कठिन है नामुमकिन नहीं, भविष्य सुरक्षित है गाँव मे देखना। आज मास्क का युग चल रहा, कल ऑक्सिजन सिलिंडर का युग होगा। अब खुद से करो तुम सवाल, क्या ऐसे तुम्हारा भविष्य सुरक्षित होगा, आज कर लो सब प्रण नया, स्वरोजगार की राह अपनायेगें, छोड़ शहर की झूठी शान, अपने गाँव सब लौट जाएंगे, मिलजुल कर रहेंगे सब साथ साथ, और फि...

ख्याल ख्याल में 6

कुछ अपने तो कुछ पराये हुये, जाने कितने रिस्ते बने और छूट गये, एक तुमसे जो संग मिला मोहब्बत में, फिर न कोई गिले और न शिकवे हुये. राह पकड़ी है मेरी तो फिर चलते रहना मंजिल आने तक, मैं कोई पत्थर भी नहीं जो मिल जाए यूहीं राह में। यूँ तो बहुत सवाल है और वक़्त मिला तो पूछ भी लेंगे किसी रोज, फिलहाल ये बताओ यूँ रोज सपनो में आने का क्या राज है न जाने क्या क्या ख्याल आते है दिल मे उनके, कभी नजरे झुकाते हैं वो कभी नजर चुराते है। अच्छा जी तो आप हमारे अंदाजे बयान को आजमा रहे हो, क्यों क्या बात कही आप हमें आजमा तो नही रहे हो। एक वादा खुद से करो कि किसी से किया वादा न तोड़ो, वजह बनो औरो के मुस्कुराने की, मुस्कुराओ और मुस्कान बांटो। कुच ख्याल आता है दिल मे, तो कागज पर उतार देते हैं, बात जो लगे दिल को, खुद से बता देते हैं। कुछ रहते हैं दिल के पास और कुछ दिल से दूर भी, कुछ बताते है हमे, कुछ दिल मे छुपा लेते हैं। कुछ ख्याल है संग कुछ सवाल है, होंठो पर मुस्कान आंखों में इंतज़ार है क्यों कोई ऐसे देखता है झुकी नजरो से, कुछ बात है या फिर हमसे दूरी का मलाल है।। कुछ समय और तुम लगाओ, फि...

अतुलनीय देवभूमि, उत्तराखंड???????

क्या कहूँ और कैसे कहूँ थोड़ा सा मैं बेचैन हूँ, अनेक युवा संग राजनेता चिंतित है मेरे लिये। कही सभायें होती है, कही व्यंग भी करते है, फिर न जाने क्यों मेरा दुख नित बढ़ता ही है।। निशदिन जाने कितने ही लोग, मेरी ब्यथा को लिखते है, फिर कोशिश कर उस व्यथा को, जन जन तक ले जाते हैं। कुछ कवितायें लिखते हैं, कुछ नारे जोर शोर से देते हैं, फिर भी देखो बिडंबना, मेरे दुख नित बढ़ते ही है। इतने सब प्रयासों से भी, क्यों बदलाव नही आता है? पलायन की जो मार पड़ रही, दर्द क्यों नही ये घटता है? क्यों सब प्रयास विफल हो रहे, क्यों मेरा सीना रोज चोट खाता है, सच में अगर मेरे अपने चिंतित है, फिर क्यों विकास नही होता पाता है?? सोचा मैं भी कुछ व्यंग करूँ, फिर चेहरे पर सोच आयी मुस्कान, अपना अपना विकास देख रहे सब, कब आया किसी को मेरा ध्यान। बेहतर जीवन पाने को आज, त्याग कर हैं सब मेरा, फिर दूर देश विदेश मे बैठकर, मुझपर गर्व का सब देते हैं नारा। कुंठित मन हो चला है मेरा, उम्मीद भी टूट रही अब, क्या कविता, धरना, नारो से, मैं फिर हरा भरा हो पाउंगा। जो मेरे अपने छोड़ चले, क्या कभी उन्हे...

कन्या जन्म है वरदान

खुद की खुशियों को छोड़ दिया, किसी और को खुशियां देने को, सर्वस्या अपना त्याग देती हैं बेटियां, दो घरों को जोड़ने को। बहुत कुछ सहना है मुझे, बिना कोई दिल में मलाल किये, बहुत कुछ खो देती है वो, बस दिल में यही ख्याल लिये।। अधूरा सा होता है बिन बेटी के, जहां में हर परिवार, फिर आती है घर मे बेटी, संग लेकर खुशियां बेशुमार। मन प्रफुल्लित हो उठता है सुनकर जिसकी चीख पुकार, वह होती है बेटी जिसपर, पापा को आता है बहुत प्यार।। मेरा घर है मेरा परिवार रहता है मन में उसके एक ख्याल, संजोती है एक एक तिनका, देती है फिर वो सारा घर संवार। ना कोई शिकायत न कोई मलाल, अपने से छोटों का रखे ख्याल, बेटी नहीं जिस घर में, क्या कभी पूरा हो सकता है वो संसार।। सालों साल बिताए घर में और दिया सभी को अतुलनीय प्यार, फिर एक पल में ही कहीं रिश्ता जोड़, कर देते है उससे किनार। पल पल अपना लगा दिया था, और दिया था एक घर जो संवार, देखो फिर बाँटने खुशियाँ, एक दिन छोड़ने को है वो उसे तैयार।। माना जग में त्याग बड़े है, किये लोगो ने आनेकों उपकार, बना अशियाना खुद का जो, हो जाये फिर त्यागने उसे तैयार। सबसे से सुन्द...

ख्याल ख्याल 5

हमने मिलकर किये थे कुछ फैसले अगर ज़िन्दगी में, तो फिर अंजाम का हकदार सिर्फ मैं क्यों बताओ?? राजी थी तुम और राजी था मै जब तब भी, फिर क्यों जुदाई का आलम मिला हम दोनों को। दूर हूं तुमसे माना मै, "खुद" मेरे को भी लगती है, दिल में मोहब्बत है तेरे लिए, ये "जीकुडी" तेरे लिए  ही धड़कती है। यूहीं नहीं चल दिये थे संग तेरे एक होकर हम यारा, बेइंतहा मोहब्बत की थी जीने को संग तेरे हमने। सारे सवाल पूछे थे तुमने और जवाब भी दिये थे मैंने, फिर क्यों आज तुम बेकसूर और मै कसूरवार हो चला। बहुत छोटी सी है ये ज़िन्दगी, क्या करना मुंह फुलाकर, जियो ज़िन्दगी जी भर, हर पल मुस्कुराकर। कुछ देर तुम भी चलकर देख लो संग मेरे, बेशक छोड़ देना अगर पसंद न आये साथ तुम्हे मेरा। दिल की बात दिल में रखना ठीक है, लेकिन हर बार नहीं, बात हो जब सम्मान की, तो फिर म्यान में तलवार रखना ठीक नहीं। कुछ सवाल है तो पूछ लो, जवाब भी मिल जाएंगे, सिर्फ जहन में बात रखना ठीक नहीं यारो। जीवन है कुछ लम्हों का सफर, सच है जानते है सब, जिंदगी से मिलना है तो देवभूमि चले आ आइये।। मासूमियत है चेहरे में और...