पिता का जीवन आसान नहीं..!
भाव जागते है मन में, लेकिन शब्द सटीक नही मिल पाते है, सब को साथ लेकर चलते है, फिर पिता को क्यों भूल जाते है। माना थोड़ा दूरी है उनसे, लेकिन सबसे अधिक विश्वास वहीं है, अनेक कष्टों को दबाकर, मुस्कान चेहरे पर लाये वही पिता है।। शब्दो मे शख्ती है उनके हरदम, क्योंकि फिक्र है सबकी पल पल, अंदर से कोमल पर कठोर दिखावा, प्यार पिता का है निश्छल। राह कठिन है चलना मुश्किल, लेकिन फिर भी धैर्य रखे जो, आये कितने आंधी तूफान, संयम बनाये रखना पिता से तुम सीखो।। चाहे कितने दोस्त बना लो, बनालो चाहे कितना दौलत शोहरत, मिले सुकुन जिस छांव में तुमको, मिलेगी बस वो पिता के घर पर। खुद से तुम एक सवाल कर लेना, पिता का जीवन तुम खुद जी लेना, कितना भार है कंधो पर, खुद उठा कर फिर तुम तुलना करना।। बहुत ही आसान जान पड़ता है, जीवन किसी पिता का जग में, चिन्ता फिक्र से हटकर जैसे, सुकून भरा हो सारा जीवन। कैसे कैसे मौसम आये फिर, कैसा तुमने वक़्त है देखा, कितने पतझड़ मौल्यार है देखे, न जाने कितनी बरसातें है देखी। खुद को डुबाकर उलझनों में, परिवार सुरक्षित हैं रखते, भरा हो गला या दिल टूट चुका हो, शिकन माथे पर न ...