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Showing posts from June, 2026

सब कुछ सबको नहीं मिलता

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लाख कोशिश करो तुम, फिर भी कुछ तो अधूरा रह ही जाएगा, सब कुछ करने की चाह में, कुछ तो पीछे छूट ही जाएगा। जो मिला है उसका लुफ्त उठाओ, वही तुम्हे खुशियां दे जायेगा, सब कुछ की चाह में एक दिन, सब कुछ ही मिट जाएगा।। एक फूल खिला था उपवन में, सुंदर था सबसे वो वन में, गुरूर था उसको खुशबू पर, भंवरे की उसपर चाहत में। एक रोज वो फिर मुरझा गया, भंवरा उड़कर दूर चला, कब सूखे फूलों पर भौंरे टिकते हैं, उपवन देख अब मुस्कुरा रहा।। सावन की बदली छा जाती है, चहूं ओर बसंत ले आती है, देख मौसम की रंगत को, चिड़िया भी निशदिन चहकती है। सावन भी एक दिन खत्म हुआ, पतझड़ को जैसे उसने न्योता दिया, समय की अदला बदली को, फिर सावन ने भी प्रणाम किया। मानव का भी बस ऐसा जीवन है, कुछ पा लेता है कुछ खो जाता है, लेकिन खोने पाने में क्या, वह संघर्ष कहीं करना छोड़ देता है। हर वक्त वह लड़ता है हालात से, फिर जीत का सेहरा सिर होता है, ज्यादा की तो चाह हमेशा रहती है, लेकिन थोड़ा भी कुछ कम नहीं होता है।। कह भी जाओ और अगर कर भी जाओ, भुलाये तुम फिर भी जाओगे, लाख बना लो महल मकान, राख में ही आखिर फिर मिट जाओगे। तेरा मेरा कर लो कितना, बालक परि...

इष्टदेव महिमा

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 ।।देवभूमि वंदना: हमारे इष्ट-देव।। देवभूमि की श्रृंखलाओं से,  गूँजे इष्टदेवों का जयकारा, धन्य हुई पावन यह धरती, धन्य हुआ यह जग सारा। डांडा नागराज विराज रहे यहां, सेम नागराज की माया, फन फैलाए रक्षा करते, करते सब पर शीतल छाया।। नरसिंह देवता जोशीमठ में, खम्ब फाड़ कर प्रकटे हैं, भैरव बाबा लाठ लिए, भक्तों की रक्षा करते हैं। गाँव-गाँव के भूम्याल तुम, क्षेत्रपाल रखवाले हो, संकट से हमें उबारने वाले, तुम भक्तवत्सल बड़े निराले हो। ज्वालपा माँ की ज्योति निर्मल, मां चंद्रबदनी कल्याण करे, राजराजेश्वरी माँ जगदम्बे, भक्तों के सब भंडार भरे। सिद्धबली हनुमान विराजे, खोह नदी के पावन तट, दीवा की ऊँची चोटी से, माँ काट रही सब माया-जंजाल। कंडोलिया ठाकुर कृपा बरसाएं, वन-पर्वत के राजा हैं, क्यूंकालेश्वर महादेव के दर पर, बजते शंख और बाजा हैं। तकड़ेश्वर की महिमा न्यारी, बिन्सर महादेव निराले, थलीसैंण से चौखुटिया तक, शिव ही सबको पालने वाले। अगणित रूप तुम्हारे ईष्ट, अगणित तुम्हारी शक्ति है, देवभूमि के कण-कण में, बसी तुम्हारी भक्ति है। हे पहाड़ी देवी-देवताओं, अपना आशीर्वाद बनाए रखना, इस पावन धरती की गरिमा,...

मोहब्बत की राह आसान नहीं..!

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मोहब्बत अगर कर ही ली है, फिर हर अंजाम को सहना पड़ेगा, मिल गया साथ तो फिर क्या, मगर तैयार मात को भी रहना पड़ेगा। हर युग में विरह की कहानी है, उसको भी अवश्य ही पढ़ना होगा, प्रेम अगर कृष्ण से करोगे, विष मीरा सा एक रोज पीना पड़ेगा। समय हर बार नया मोड लेगा, पास होकर भी प्रेमी से दूर रहोगे, कर के हर बात मन के उसकी, इल्जाम बेवफाई का भी सहोगे। मोहब्बत नाम है त्याग का, त्यागकर ही वो तुम्हे अपनाएगा, अगर मिल गई खोट जरा सी भी, इश्क फिर तार तार हो जाएगा।। तनहाई में वो कबूल कर ही लेंगे, तुम्हें भीड़ में साथ ढूंढना होगा, थाम जो लोगे एक बार हाथ उसका, फिर ताउम्र निभाना पड़ेगा। ये तो दरिया है आग का pari, डूबकर ही पार करना होगा, और आ गई घड़ी आखिरी अगर, हँस के उसको भी गले लगाना पड़ेगा।। मोहब्बत मुकम्मल होगी जरूरी नहीं, दायरा अपना पहचानना होगा, सब्र से काम लेना मेरे यार तुम, आशुओं को तनहाई में बहाना पड़ेगा। ज़ख्म अनेक मिलेंगे इस राह में, दर्द को दवा समझ पीना ही होगा, और ज़ख्मों की नुमाइश न करना, ये दर्द तुझे सिर्फ अकेले ही सहना पड़ेगा।। चोट दिल पर खाई है तो असर कलम में भी दिखेगा, ज़ख्म शरीर के भर जाएंगे ले...