रंगु कु त्योहार होली
फूलूँ मा फुलार आयी, डाल्यु मा मौल्यार छायी, आओ सभी दगड्यो, देखा होरी कु त्यौहार आयी। मेलु फुली फ्यूंली खिली, डांडयू मा बुराँस हैंसु, आओ मिली सभी दगड्यो, खिलला होरी दगडी ऐंसु... बसंत बयार आयी, खिलीन फूल बनी बनी का, मुखड्यूं मा मौल्यार आयी, माया की जन ऋतु ऐगे प्रेम का रंगु मा भीजिनि क्वी त, कै खुणी रैबार ल्याई, नखरयाली व बांद भी आज, मेरा रंग मा रंगी ग्याई। दगड्यों की टोली चली, होरी का गीतू बीच, ढोल दमाऊं का दगड देखा, पंडों की रंगत अइँच। कभी बीरुं की बीर गाथा, त कभी प्रेम का गीत सजला, खुदेलु प्राण कैकु, क्वी मेरा आणा कु बाटु देखला।। अपणा बिरणा सभी आज गला भिटेइ जाला, बैर भूलि आज होरी का रंगू मा रंगेला। शान्ति अर प्रेम कु पर्व आवा सभी होली खेला, मन प्रसन्न कैकी आज बस रंगू मा रंगे जावा। होरी का रंग आज रंगला, आपसी द्वेष आज मिटॉला, रंग बिरंगा सभी ह्वे जौला, प्रेम कु पाठ सभु थै पढोला। आवा हे दीदी आवा हे भूलौ, ढोल की ताल मा सभी नचला, झट बौड़ी आवा शहर छोड़ि, प्रेम का गीत संग होली खिलला। Pari © ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everythi...