साजिश या सबक
थोड़ी सी मायूसी है, दिल जैसे टूट सा गया है, बेफिक्र सा था और उम्मीदों को जैसे आज धक्का लगा है। बहुत मेहनत कर रहा था और मौका छिन गया आज, बिन दौड़े ही जैसे कोई दौड़ हार गया मै आज। फिर भी उम्मीद है कि जैसे कुछ अच्छा हो जाएगा, विपरीत जो आया है फैसला, वो फिर बदल जाएगा। आंखें नम होना चाह रही है, लेकिन रो नहीं सकते। लगी चोट है ऐसी, कि घाव किसी को दिखा नहीं सकते। आज महसूस हुआ कि हार ऐसी भी हो सकती है, लड़ाई लड़े बगैर आपको चोट भी लग सकती है। ऐ ज़िंदगी बहुत बेरहम है तू, आज फिर महसूस हुआ है, दिल टूटा, दर्द मिला और जैसे कुछ हाथ से छूटा हुआ है। चलो तेरा ये फैसला भी अब हम कबूल करते हैं, सहज मिली इस हार को भी हम कबूल करते हैं। पर अब मै रुकने का नाम नहीं लूंगा ये भी समझ लेना, बिन लड़े तो अब तुझे मैंने भी जीतने नहीं देना।। pari ✍️