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Showing posts from October, 2018

ख्याल ख्याल 4

मैंने तो पहले ही कहा था आंखे नम हो जायेगी तुम्हारी भी, क्यों छेड़ा तुमने वो तार आज फिर से आशिकी का। ऐसी मोहब्बत ही अक्सर किताबो में लिखी जाती है, जो होती तो है बेइंतहां लेकिन पूरी नहीं होती..।। सवाल भी तुम हो और जवाब भी तुम ही हो, अब क्या बाकी रहा जब हर ख्याल तुम हो। कुछ कहा और कुछ सुन लिया, कुछ कहना था और कुछ कह दिया। मुझसे मिलकर वो नजरे चुराते है क्यों, शायद दिल में छुपाए हुए कोई राज है।। कुछ लम्बी सी थी रात और सपना भी थोड़ा लम्बा हो चला, आंख खुली तो हकीकत से रूबरू हुए और साथ सपना भी टूट गया। देखा जो मैंने खिड़की से बाहर आज फिर मौसम अलग था, भीनी भीनी खुशबू थी हवा में जैसा आया कोई पैगाम था। कुछ लब्ज़ कहे थे मैंने भी, तुमको अपना जान समझ। साझा तुझसे दिल की बात करी, तुमको एक राजदार समझ।। कुछ पल कह दो अब तुम भी मोहब्बत में यारा, तेरी खामोशी अच्छी नहीं लगती मुझे बर्षो के बाद भी। रातें भले कितनी भी लंबी क्यों ना हो ह्यूंद में, तुम साथ हो तो सफर ज़िन्दगी भी छोटा ही होगा मेरे यार। तोड़ दी हैं मैंने जो बंदिशे दुनियाभर की आज तेरे लिए, क्या तुम जरा से होंठ हिला ...

ख्याल ख्याल 3

कुछ लब्ज जो लिख दिये तारीफ में उसकी हमने, सुना है आजकल पांव जमीं पर नहीं रहते उनके। मैंने तो पहले ही कहा था हमसे जरा दूर रहना, हम मौसम कि तरह आने जाने वालो में नहीं। अब अगर दिल में बस ही गए हैं तो लब्जो में भी ले आओ, कब तक बस इशारों इशारों में हाल ए दिल बयां होगा।। बहुत कोशिशों के बाद भी लब्ज़ बस सहमे ही रहे होठों में उनके, तमाम उम्र इंतजार की सजा मिले क्या कम है बताओ तुम।। मैंने तो खुद को समझा लिया था तेरे जाने के बाद ही फिर से, क्यूं आए फिर से लौटकर तुम अगर तनहा ही रहना था हमको।। मैंने की है मोहब्बत और इसका एहसास भी मुझे रहेगा हमेशा ही, सिर्फ मतलब के लिए साथ हो जाने वाले अक्सर तनहा ही मिलेंगे।। रातों में नींद आंखो के और दिन का सुकुन संग नहीं होता माना, तेरे लिए तेरे बगैर मुस्कुराना काफी है फिर भी मोहब्बत में।। रात कट ही जाती है तनहा और फिर बेला आती है तुझसे मिलन की, यही वो एहसास है यकीनमानो जिसके भरोसे तमाम उम्र कट जाती है।। एक मैं जो बस मोहब्बत के लिए तड़पता रहूं मोहब्बत करने के बाद भी, एक तुम पा लो सब कुछ जहां में बिना कुछ जतन किए यूहीं।। Pari ©   ...