ख्याल ख्याल 4
मैंने तो पहले ही कहा था आंखे नम हो जायेगी तुम्हारी भी, क्यों छेड़ा तुमने वो तार आज फिर से आशिकी का। ऐसी मोहब्बत ही अक्सर किताबो में लिखी जाती है, जो होती तो है बेइंतहां लेकिन पूरी नहीं होती..।। सवाल भी तुम हो और जवाब भी तुम ही हो, अब क्या बाकी रहा जब हर ख्याल तुम हो। कुछ कहा और कुछ सुन लिया, कुछ कहना था और कुछ कह दिया। मुझसे मिलकर वो नजरे चुराते है क्यों, शायद दिल में छुपाए हुए कोई राज है।। कुछ लम्बी सी थी रात और सपना भी थोड़ा लम्बा हो चला, आंख खुली तो हकीकत से रूबरू हुए और साथ सपना भी टूट गया। देखा जो मैंने खिड़की से बाहर आज फिर मौसम अलग था, भीनी भीनी खुशबू थी हवा में जैसा आया कोई पैगाम था। कुछ लब्ज़ कहे थे मैंने भी, तुमको अपना जान समझ। साझा तुझसे दिल की बात करी, तुमको एक राजदार समझ।। कुछ पल कह दो अब तुम भी मोहब्बत में यारा, तेरी खामोशी अच्छी नहीं लगती मुझे बर्षो के बाद भी। रातें भले कितनी भी लंबी क्यों ना हो ह्यूंद में, तुम साथ हो तो सफर ज़िन्दगी भी छोटा ही होगा मेरे यार। तोड़ दी हैं मैंने जो बंदिशे दुनियाभर की आज तेरे लिए, क्या तुम जरा से होंठ हिला ...