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Showing posts from April, 2019

देशहित पहला कर्तव्य

अक्सर मैं भी मुस्कुरा देता हूँ, हालत खुद की देखकर, देशभक्त बन बैठे हैं कुछ आज, ईमान खुदका बेचकर। कृपा करना अपनी केशव, बचे रहे इंसानियत जहाँ में, मतभेद रखना आपस में पर, मनभेद का खेल न खेला जाये।। सत्ता के गलियारों का, स्वाद सभी को है भाता, लजीज बिरयानी खाने को, हर सयाना है यहाँ आता। गर्दन तक हो कीचङ में सने, फिर भी कुर्ता है चमकाता, लाखों करोड़ो चटकर जाता, और मजाल जो एक डकार हो आता। मैं ही सच्चा मैं ही काबिल, बस एक दौड़ है जैसे ओलम्पिक की, कुर्सी के लालच के खातिर, होड़ लगी है बस नींचपन की। कोई चोर तो कोई सिपाही, खुद को सर्वोपरि समझते हैं, लोकतंत्र के स्तंभ है जनता, वादों से निशदिन उसको भरमाते हैं।। लेकिन हमको क्या करना है, लड़ने दो नेताओ को, मुफ्त में कोई भीख जो दे दे, खा जाओ बस चुपकर के। देशहित से हमें क्या लेना है, अपना स्वार्थ सिद्द होना जरूरी है, धिक्कार है ऐसे लोगो पर , जिनके लिये देश ज्यादा चमचागिरी जरूरी है। ताज्जुब नहीं है कुछ भी, पढ़े लिखे तो ज्यादा अनपढ़ है, सच दिखता है सामने फिर भी, आँखों मीच हो रहे अंधे हैं। सही सोच और सही निर्णय अगर, लेने की तु...

ख्याल ख्याल में 12

कुछ हवा बदली सी लग रही है, कुछ खुश्बू आज हवाओं में हैं। आज फिर वही मौसम लगता है, मिले थे जब हम तुम पहली पहली बार। शब्द चुने थे तारीफ में तेरी, सबके सब खूबसूरत थे, दिदार किया फिर सबने तेरा, न जाने अब वो खो गए कहाँ। मुलाकातों का सिलसिला क्या कम हुआ तेरा मेरा, कुछ लोग समझने लगे हम दूर हो गये। फिर खोला मैंने दरवाजा दिल की खिड़की का, आज भी बस तेरे आने के इंतजार में। दोस्ती की ये बिरासत मिलती है सिर्फ खुशनसीबों को, बाकी क्या पाया क्या खोया हिसाब सभी लगाते है। ख़्वाइशों का सिलसिला है, कभी ये खत्म होगा नहीं, कोई मुझे पसंद नहीं, तो किसी को मैं इस जहाँ में। मैंने पूछ ही लिया उससे एक सवाल और आज, किस्मत में नही हो तो फिर दिल मे क्यों उतर गये? अलविदा भी बोल गये और मुड़मुड़ के भी देखते हो, मोहब्बत अगर बाकी है, तो रूक जाओ ना हमेशा के लिए। थोड़ी सी हंसी थोड़ी से नजाकत थोड़ी सी मासूमियत थोड़ी सी शरारत न जाने क्या क्या और कैसे किरदार है आपके, डर लगता है उफ्फ कहीं इश्क़ न हो जाये। मैंने सुना तुमने भी इस बार रंगों से दूरी बना ली, वजह पूछने पर तस्वीर मेरी दिखा डाली। कर लो शिकायत तुम...