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Showing posts from July, 2023

प्रेम एक पूर्णविराम..!

कैसी भी हो बात दिल की, थोड़ी तो छुपा लेनी चाहिये, सोच समझकर ही किताब दिल की अपनी खोलनी चाहिये। यूहीं आँख मूँदकर नहीं करते भरोसा हर किसी पर, जज्बातों की दुकान हर किसी के आगे खोलनी नहीं चाहिये। सालों बीत जाते हैं जहाँ में, एक नायाब दोस्त खोजने में, लेकिन एक पल नहीं लगता, वो नायाब हीरा खो देने में। मुफ्त में मिल जाती है सलाह हर ओर से तुमको यकीनन, लेकिन भरोसा नहीं मिलता कभी भी लाखों लुटाने में..।। एक उम्मीद हमने भी की थी कि जवाब में प्रेम मिलेगा, जैसा हमने चाहा है उसे वैसे ही वो भी दिल खोल देगा। नहीं था हमें मालूम कि हर चाह पूरी नहीं होती जहां में, ख्वाइशें नहीं मुकम्मल होती हर किसी की जहां में.. चलो अब हम भी अपना दिल कैद पिंजरे में कर लेते हैं छोड़कर राहें प्रेम की हकीकत के जहां में जी लेते हैं। प्रार्थनाओं में खुशियाँ मांग लेंगे उनकी ईश्वर से हम भी। साँस थमने तक उसका नाम नहीं लेंगे अब हम भी... कर लिया है खुद से वादा, कि अब एक नई डगर खोजेंगे, राह अब दोबारा मोहब्बत की, हम अब नहीं नापेंगे। बहुदा प्रेम पा लिया तुमने, pari इस जन्म में, छोडकर ये डगर अब हम, प्रेम पर पूर्णविराम लगायेंगे..।। pari✍️

तुझसे मुलाकात होती रहे

 तेरी हर बात मुझे अच्छी लगती है, हुयी हर एक मुलाकात अच्छी लगती है। तेरे लहजे में थी वो नजाकत मुझे याद है, वो झुकी नजरों से मुस्कुराना मुझे याद है वो खामोशियों में भी बहुत कुछ कह जाना, मुस्कुराते चेहरे पर गुस्से का वो आ जाना। मुझे याद है वो तेरा होंठो को सिले रखना, और छोटी छोटी बातों में वो रूठना मनाना.. वो आखिरी मुलाकात के कुछ पल, याद है मुझे वो हमारा आज और कल। कस्मे वादों का वो सिलसिला याद है, वो संग जीने मरने की ख्वाईशें याद है। आज सालों बाद वक्त ने खुद को दोहराया है, न जाने किस इरादे से हमें एक सामने लाया है। तुम भी उम्र के अनेक सावन को देख चुकी हो, हमने भी अनेकों सावन बिन तेरे बिता लिये हैं... खैर अब तो बस एक ही आरजू है ईश्वर से आखिरी, मुकम्मल खुशियाँ मिलें तुम्हें हर बार ही। यूहीं समय समय पर तुझसे मुलाकात होती रहे, जीवन के पूर्णविराम से पहले तुझसे हम जरूर मिलें।। ✍️pari

यूँही कुछ लम्हों की बात

आँखे जैसे कोई शराब हों होंठ तेरे पंखुड़ी गुलाब सी। यूँ लहराना तेरा केशों को.. अदायें तेरी बेहद खास सी... झुकी आँखों मे तेरे वो सवाल अच्छा है, मुलाकात न सही तुझसे बात होना अच्छा है। नजरे जो फेरी हमने जहाँ में यहाँ वहाँ, तो देखा होंठों का तेरे गुलाब अच्छा है...! चाह थी कि राह में मिले कोई चाह से, लेकिन अगर वो आ न सके किसी औऱ की चाह से, राह क्यों बीरान लगे फिर बोलो उसकी चाह से, हम भी चले राह को अपने फिर अपनी चाह से... लिखावट को अपनी थोड़ा और सुधार लेंगे, शब्दों को कैसे जोड़ना है वो भी सीख जायेंगे। लेकिन कर के वादा मुकर जाते हैं कैसे, हुनर न जाने वो कहाँ सीख पायेंगे। सच को सच कहने का हुनर चाहिये, जो कर सको वही बात कहनी चाहिये। बेशक कह दो न किसी बात से तुम, लेकिन कही बात को झुठलाना नहीं चाहिये.. कुछ बात करी हमसे, फिर अधूरी ही छोड़ दी, दोस्ती अगर करनी थी तो फिर क्यों तोड़ दी। न जाने कौन सी बात है जो सच थी दोनों में, शायद बात जरूरी नहीं थी या फिर हम.. किया था वादा की मुलाकात करेंगे, अनकही बातों को मिलकर कहेंगे.. न जाने कितनी बड़ी बात थी पास उनके, जो कहा उन्होंने कि फुर्सत में करेंगे.. न दिल मे कोई ...