ख्याल ख्याल में 12

कुछ हवा बदली सी लग रही है, कुछ खुश्बू आज हवाओं में हैं।
आज फिर वही मौसम लगता है, मिले थे जब हम तुम पहली पहली बार।

शब्द चुने थे तारीफ में तेरी, सबके सब खूबसूरत थे,
दिदार किया फिर सबने तेरा, न जाने अब वो खो गए कहाँ।

मुलाकातों का सिलसिला क्या कम हुआ तेरा मेरा,
कुछ लोग समझने लगे हम दूर हो गये।

फिर खोला मैंने दरवाजा दिल की खिड़की का,
आज भी बस तेरे आने के इंतजार में।

दोस्ती की ये बिरासत मिलती है सिर्फ खुशनसीबों को,
बाकी क्या पाया क्या खोया हिसाब सभी लगाते है।

ख़्वाइशों का सिलसिला है, कभी ये खत्म होगा नहीं,
कोई मुझे पसंद नहीं, तो किसी को मैं इस जहाँ में।

मैंने पूछ ही लिया उससे एक सवाल और आज,
किस्मत में नही हो तो फिर दिल मे क्यों उतर गये?

अलविदा भी बोल गये और मुड़मुड़ के भी देखते हो,
मोहब्बत अगर बाकी है, तो रूक जाओ ना हमेशा के लिए।

थोड़ी सी हंसी थोड़ी से नजाकत
थोड़ी सी मासूमियत थोड़ी सी शरारत
न जाने क्या क्या और कैसे किरदार है आपके,
डर लगता है उफ्फ कहीं इश्क़ न हो जाये।

मैंने सुना तुमने भी इस बार रंगों से दूरी बना ली,
वजह पूछने पर तस्वीर मेरी दिखा डाली।

कर लो शिकायत तुम भी मुझसे, बस रूठकर बैठना अच्छा नहीं।
सारे इल्जाम सह सकता हूँ जान, बस तेरी खमोशी मुझे कबूल नहीं।।

थोड़ा चुप हूँ मैं भी अगर, कुछ तो मन में मंशा होगी।
पल पल चाहा था तुमने भी, कुछ तो मुझमें भी बात होगी..

शिकायत हो या फिर कोई शरारत, हमसे किया करो,
भुला दुनिया की बातें सारी बस मंद मंद मुस्कराया करो।

मैं हूँ इंतज़ार में तेरे शाम से मेरी ज़िन्दगी,
तुम न सही तुम्हारी खैरियत ही आ जाये।

मन आज थोड़ा उदास है मेरा न जाने क्यूँ,
कोई है तो बताओ जो होंठो पर मुस्कान ला दे??
Pari

© ® Pari....

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