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Showing posts from November, 2019

उठाओ तलवार फिर रानी लक्ष्मीबाई

कैसे चुप हम रह सकते हैं, कैसे सब चुप सह सकते हैं, खुद को सिहँ बताने वाले, कैसे हम सहम सकते हैं। नारी प्रधान नारी सम्मान, सिर्फ नारों तक सीमित होगा क्या? बड़ी बड़ी बातों से ही,  निर्भया को इंसाफ मिलेगा क्या? परंपरा सी बनती जा रही, दो दिन कैंडल मार्च निकालने की, फिर सब भुला देते हैं, जैसे पूरी हो चली हो ज़िम्मेदारी सी। इंसाफ मांगना आदत है, इंसाफ करने की आदत डालनी होगी, नारी के सम्मान के लिये, रानी लक्ष्मीबाई सी हुंकार लगानी होगी। स्वयँ हमे ही लड़ना होगा, हाथोँ में तलवार लिये, शीश धरा को चढ़ाने होंगे, सभी धरा के कातिलों के। बहुत खेल लिया धर्मनिरपेक्ष का खेल, बहुत बन लिए सेक्युलर, हम जैसे थे वैसे अच्छे, अब धर ला दो अत्याचारियों का सर। विनम्र निवेदन है मेरा आज, कानून के सब रखवालों से, छोड़ दो पैरवी करना अब तुम, अपनी माँ बहनों के कातिलों के। एक जुट होकर अपनी पहचान बताओ, सजा दिलाओ उन बेरहमो को, जिनसे लज्जित हो रहा समाज, फाँसी पर लटकाओ उन हरामियों को। pari

प्रेम ही जीवन सुख है

कलम उठायी फिर से आज, दिन बीते हैं बिन अनेकों साज, मन व्यथित था कुछ रोज से, शायद तेरी बिछड़न की सोच से। हिम्मत कर फिर कलम उठायी, खोला एक फिर पन्ना आज, लिख डालूँ सब मंशा मन की, लिख डालूँ दिल के सब राज।। प्रेमवश होकर सबको अपना जाना, प्रेम ही सबको बाँटा निशदिन, प्रेम भाव से कर्म किये हैं, मनुष्य मिले जीवन मे भिन्न भिन्न। पिरो दिये थे मोती अनंत कुछ मंगलमय की कामना में, पग पग पाँव रखे फिर संभल, ज्यों छाले हो पांव में।। फिर से होगा नव सवेरा जीवन में, उम्मीद तिमिर के जाने की, प्रेम के गीत रचे फिर मैंने, आस प्रेम जगत को पाने की। राह कठिन है माना मैंने, लेकिन निष्चय मेरा भी अटल होगा, प्रेम ही जीवन का अनन्त सत्य है, प्रेम ही मेरा धर्म भी होगा।। मेरी हर कृति में प्रेम दिखेलु, सर्वजन हिताय संदेश दिखेलु। अपना पराया सीमा छोड़, परोपकार से नाता होगा, मेरी हर ख्वाइश में प्रेम मिलेगा, मेरी हर इच्छा में प्रेम दिखेलु। तुम भी कोशिश अनुसरण करना, जीवन मे बस प्रेम ही भरना। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

तोलो फिर बोलो, प्रेम रस जीवन मे घोलो

सलवटें पड़ ही जाती है रिश्तों में अक्सर एक वक्त पर, बेवजह जब गिले-शिकवे जमा कर जातें हैं हम जहन पर। कुछ कहना है तो कहो, लेकिन पहले उस बात की गहराई समझो, खुद के दिल से जोड़ों बात को, फिर कहीं उसका रस घोलो। स्वयं ही तुम स्वयं को समझा लोगे, अगर शब्दो का सही चुनाव कर लोगे, गिले शिकवे स्वतः ही मिट जाएंगे, पराये भी अपने ही लगने लगेंगे। दिल सबका दुःखता है, शब्द सबको घायल करते हैं, कोई रो जाता है सुनकर, किसी की मुस्कान दिखती है। बेवजह ही ग्रीष्मकाल का अनुभव करना ठीक नही होता, शांत और शीतल मन ही सुख का आभास कराता है।। शब्दों का तुम जरा ख्याल रखना, पहले तोलना फिर बोलना, मुकाम हासिल होगा जरूर तुम्हें, बस अकाश के साथ जमीं का भी ख्याल रखना। संयम संग मुस्कान की अलग होती है पहचान, ख्याल रखो अगर सबका, अलग दिखेगी तुम्हारी शान। तेरा मेरा मत करना, सब दुनिया मे है मायाजाल, प्रेम ही जीवन प्रेम ही ईश्वर, दुनिया मे बस एक मिशाल।। शब्दों का चयन करना एक कला है, और इस कला में माहिर हर कोई नहीं, सोच समझकर उपयोग करना, शब्दों का अपना कोई रोल नहीं। किस्से कहानियां तो बन ही जाएंगी, तुम उम्रभर...