मेरी खुद मेरु प्राण

लौकणी कुयेड़ि होली मेरा घौर गौं मा,
ठण्डी हवा पाणी बगणु होलु नॉला पंदेरों मा।
बांद व नखरयाली देखणी होली सुपन्या मेरा,
ऑंखयु मा जग्वाल वीन्का प्रीत दगड जिकुड़ा मा।।

बिन्सर की बेला होली, रमदी गौड़ी छानी मा,
दादी बैठि चुल्ला खांदा, दादा कु हुक्का थुमणि मा।
मांजी ग्युलु करदी छानी, बैठ्या होला बाबाजी दिवली मा,
दीदी जाणी होली इसकुल, भुला लुक्युं खतणी मा।।

गैल्या मेरा सभी घौर, क्वी बकरा क्वी जयूँ होलु गोरु मा,
पधनी बौ कु ककडाट अर, दगड डॉर भैजीकी ऑंखयु मा।
बोडा सगडो पाणी चरणु, बोडी जयीं होली बणु मा,
आओ घंटी बजदी जनि, दौड़दा इसकुल्या इस्कूलूँ मा।।

मेरी भी याद बसीं छन, वखि आज भी बाटा अर घाटों मा,
माल्टा, मसूर, प्याज, ककड़ी, स्यो अर अखोडूं की चोरी मा।
गिल्ली डंडा, गुच्छी, खो खो, अर मारामपिट्टी की चोट मा,
किताब कॉपी, स्कूलै घंटी ,गुरुजी की डैर अर कंडाली का टैर मा,

बस्यूं च प्राण मेरु अभी भी वख, चौका पंदेरा खेत अर खल्याणु मा,
वो स्वाणु दगडू भलु गैल्यों कुं, अर मायदारु की माया मा।
Pari

© ® Pari....

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