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Showing posts from December, 2023

राधे कृष्ण नाम जपो

कृष्णा कृष्णा कहते जाओ मन का मैल धोते जाओ, सारे काम बन जायेंगे कृष्णा तेरे पास आएंगे। मन में कोई बैर न रखना मानवता के बन्दों से, कृष्णा कृष्णा कहते रहना आते जाते भक्तो से।। मैं भी तेरे चरणों में नमन सदा ही करता हूं, दिन के चारो पहर राधे कृष्णा जापता हूं। दिल के मेरे सुकुन तब भी आता है, राधे कृष्णा मेरा तन मन जब गाता है। सुन्दर सलोना जिनका मुख मंडल मुस्काता है, कृष्णा मेरा राधा संग बहुत ही सुहाना लगता है। कर लो तुम भी मन से कृष्णा राधा का गुणगान, जन्म सफल होगा मुक्ति मिलेगा बैकुंठ धाम।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

सुबह होती है निशा के बाद ही

मेरा गर्व था तू, मेरी उम्मीद के पीछे की हिम्मत था तू। जब जब मैं हुआ भ्रमित, मेरी डूबती नाव का सहारा था तू.. मैं रहूं खामोश, मेरी खामोशियों का जवाब था तू! चाहे कुछ भी कहो तुम आज, मेरी ज्यू जान था तू।। राहत मिलती थी मुझे, वो जी का सुकूँ था तू, रात के घने अँधेरे में भी, उजाले की किरण था तू। बेशक भटक जाता कहीं राहों में मैं भी अक्सर ही, मेरी हर राह पर जैसे दिशासूचक था तू।। टूट चुका है गुरुर मेरा, तूने जो दिखायी मुझे मेरी औकात है, मैंने तो माना था बस तुझे ही ज़िन्दगी अपनी। लेकिन मैं तो बस तेरे लिये एक खिलौना भर था। चलो देर से ही सही, भृम और गुरुर टूटा तो सही..! यही बस जीवन की एक सच्चाई है, सिवा अपने सारा जग बस पराया है। कर खुदपर भरोसा और जुट जाओ शिद्दत से, फिर न कोई गम होगा, जहां फिर तेरे कदमो में होगा.. Pari ✍️

बस कुछ ख्यालों में

जिंदगी अब सस्ती हो गयी, चंद पैसों में बिकती है। इंसानियत बस अब किताबों में है, और किताबें अब सड़को में दिखती हैं.. सुकूँ की खोज न कर इस जहाँ में अब, सुकूँ खोजते खोजते चैन भी खो जाएगा।। ज़माना बदल चुका है, अब हालात बदलने बाकी है, दिल की बात न कर अब, बस कुछ जज्बात बदलने बाकी हैं ज़िन्दगी एक जंग है, और हम सिपाही भर, मरना है अंत जानते हैं, फिर भी लड़ रहे मुस्कुराकर...👆🏻 आया फिर बसंत पर्वतों में, खिल गये फूल पेड़ो में, चहुँ ओर हरियाली आयी, आया मौल्यार चेहरों में। मैं भी हूँ का बार सालों बाद, मनाने घर होली का त्योहार, तो फिर हो जाओ तैयार, मनाएंगे होली सब अबकी बार।। मैंने जो लिखे तो कुछ शब्द कविता बन गए, तुमसे बिछड़ने का जैसे सबब बन गये। यकीकन तुम आज दूर हो मुझसे यारा, आज ये शब्द ही तेरे होने का एहसास बन गये...!! Pari✍️

यादों की वो बात

 कैसे भूल जाऊँ वो बचपन मे बिताये दिन, वो पीपल की छांव थी वो बाबा जी का डर। अक्सर ही तो तेरी याद आती है यहाँ मुझको, आँखें होती है नम सोच बात उन दिनों की फिर.. वो बालपन था मेरा वो घुटनों के बल चलना वो मिट्ठी में गिरना और फिर वो मिट्टी को ही चरना। मिट्टी में लतपत वो चेहरे का हो जाना, वो मासूमियत से फिर माँ की राह को तकना... दिन फिर बीते कुछ और बचपन के, घुटनों को छोड़ शुरू फिर किया चलना पैरो से। कभी खायी चोटें गिर उठकर लड़कपन में, वो दादी के दुलार में दादा जी के लाड में.. बिताये दिन फिर वहीं गांव की पाठशाला में, वो मौज थी यारो संग कभी मास्टर जी की डांट में। चुराये आम तो कभी सेब लड़कपन में बागों से, न जाने स्वाद कैसा था अपने छोड़ पराये खेतों मे। अब तो बस याद बाकी है सब जैसे कोई सपना हो, नींद में थे गहरी किसी ने आज नींद से जैसे जगाया हो यादों में ही बस अब तो वो पेड़ों की छाँव गांव की, वो कच्चे रास्ते ..वो खिलखिलाता आंगन गांव का। Pari✍️