Posts

Showing posts from June, 2021

मुझे भुला पाओगे क्या...?

मैं लिख भी दूँ अगर कहीं, कि दर्द होता है क्या, तुम उसे पढ़ने भर की हिम्मत जुटा पाओगे क्या..? महफ़िलें सजा भी दूँ कहीं मैं अगर, बैठने की उसमे हिम्मत तुम जुटा पाओगे क्या। तुम तो हो गैर हमेशा से ही मालूम है मुझे.. अपनेपन का एहसास दिला पाओगे क्या..?? छोड़कर जाओगे साथ मेरा तुम यकीनन फिर भी कुछ पल मेरे संग बिता पाओगे क्या..? मिलती है राहत बिता के फुरसत के पल तेरे संग, थोड़ी सी फुरसत आज भी निकाल पाओगे क्या..? मैं कर रहा महसूस तेरी कमी को आज बेइंतहा, इस कमी को तुम कभी मिटा पाओगे क्या...? तेरी यादों का सिलसिला है मेरे सीने में, भुला दूँ तुम्हें, कोई ऐसी दवा पिला जाओगे क्या...? मेरी कलम न लिखे तेरे बारे में कुछ भी, कोई ऐसा एहसान तुम कर जाओगे क्या..?? ©®Pari✍️

मेरी नाकामयाबी रिश्ते निभाने की

किसी की दुआ कबूल तो कोई मजबूर हुआ है, सोचा मुद्दतो बाद कोई पराया अपना हुआ है ख्वाइश तो थी तमाम खुशियाँ तुझपे लुटाने की, जितना प्यार किया तुझे तू उतना ही दूर मुझसे हुआ.. यक़ीनन मैं तेरे काबिल न था, ये तो जान लिया था मैंने, लेकिन फिर भी अनजान बन हर पल तेरे पास मैं रहा। मैंने कभी सोचा तक नहीं कि तुझसे दूर मैं जाऊं कभी, लाख कोशिशों के बाद भी तू मेरे करीब आज न हो सका।। दोष सिर्फ एक ही मेरा की मोहब्बत बेपनाह मैं करता हूँ, खुद की खुशी से पहले बस तेरी खुशी मैं खोजता हूँ। लेकिन तुम सही हो हर बार मेरा यही है मानना, क्योंकि कमियों के पिटारा मैं ही तो हूँ इस जग में।। एक आवाज पर तुमने सबको मेरे लिये छोड़ था दिया, ऐसा बलिदान जो मेरे लिए सबसे बड़ा था तुमने किया। मेरे हर अपने को अपना समझ गले था लगाया तुमने, औऱ मैं हार गया कोशिशों में, देने की खुशियां बेसुमार तुझे...!! Pari