मेरी स्याली
मेरी स्याळी दिखेणकी बांद व मनमोहणयां छविं लगान्द, भली स्वाणी मुखड़ी वीन्की माया जन खैंची लांद। जन छौ सुणी उन्नी व मिली बांद जन देशवाली, क्या बतों दगड्यो मेरा कन च मेरी प्यारी स्याली। जून सी मुखड़ी वीन्की, तैलु हो जन रूडी घाम, मुलमुल हैसणु कभी, कभी नकुड़ी म गुस्सा बीजाम बन बनी का नखरा वीन्का बात करदा आली-जाली, क्या जी बतों दगड्यो मेरा कन च मेरी प्यारी स्याली। जब जान्दू सौरास मि भी, खूब सेवा व करदा मेरी, भलु भलु खाणु मीठी मीठी छविं समणी रखदा धैरी। सब गुण सम्पन्न यन च, जन मेरा चौक नारंगी सी डाली क्या जी बतों दगड्यो मेरा कन च मेरी प्यारी स्याली। उन भी दगड्यो बिन स्याली कु सौरास लगदा खाली खाली, काली हो या गोरी हो तैली हो च हो जिकुड़ी की मयाली। ब्यो करयां जरा देखी-भाली, जख हो कम से कम एक स्याली.. सब्बी धाणी एक छोड़ अर एक छोड़ बात वीन्की निराली.. क्या जी बतों दगड्यो मेरा कन च मेरी प्यारी स्याली Pari © ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything...