ख्याल ख्याल में 11

मैंने तो ज़िन्दगी की किताब खोल दी है तेरे सामने,
अब तुम ही ढूँढ़ो अपनी मोहब्बत वाला पन्ना अब।

आसान सी जान पडती है मेरी भी ज़िन्दगी दूर से,
राह के काँटो को देखना मुमकीन नही सभी के लिए।

मुस्कुराते चेहरे के लिए पीछे दर्द भी हो सकता है यारा,
ये पहेली को बुझाये ऐसा कोई दिलदार न मिला प्यारा।।

अक्सर निकला मैं भी तेरी चाह में खुद को छोड़ पीछे,
मानी थी तेरी हर बात और चला तेरे संग यूँ ही आंख मीचे।

सिलसिला आज भी अधूरा सा लगता है अपनी मोहब्बत का,
आज भी जैसे वहीं हूँ मैं, जहाँ से शुरू हुयी थी कहानी हमारी।

जोर जोर से शोर मचाये दिल मे छुपा हो जिसके चोर,
शांत भाव से सत्य है चलता समय समय पर होती भोर।

जरूरी तो नहीं कि हर बात सिर्फ शब्दो से कह दी जाये,
चेहरे के भाव और आँखे भी कह जाती है बहुत कुछ अक्सर।

रुक रुककर करवट बदल रहा है मौसम रोज,
न जाने कौन वफा और कौन बेवफा हुये जा रहा है।

आँख खुलते ही तेरा दिदार हो मेरा दिल चाहता है,
तेरी मोहब्बत पर बस मेरा हक मेरा दिल चाहता है।

चलो फिर चलते हैं साथ साथ कुछ पल जीवन राहों में,
फैसला फिर बदलते है खुश रहने की चाहत का।

सब्र से बढ़कर कोई तप नहीं, न मौन से बड़ा कोई त्याग।
ये जीवन विधि जान ली जिसने, खुल गये समझो उसके भाग।

दिनों दिन खुद को मशहूर वो किये जा रहे हैं,
बड़े साहस के साथ अपना झूठा किस्सा सुना रहे हैं।

जो सीखा है मैंने हुनर लिखने का कलम से,
तन्हाई भी मुझसे अब बातें करने लगी है।
Pari

© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything

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