तोलो फिर बोलो, प्रेम रस जीवन मे घोलो

सलवटें पड़ ही जाती है रिश्तों में अक्सर एक वक्त पर,
बेवजह जब गिले-शिकवे जमा कर जातें हैं हम जहन पर।

कुछ कहना है तो कहो, लेकिन पहले उस बात की गहराई समझो,
खुद के दिल से जोड़ों बात को, फिर कहीं उसका रस घोलो।

स्वयं ही तुम स्वयं को समझा लोगे, अगर शब्दो का सही चुनाव कर लोगे,
गिले शिकवे स्वतः ही मिट जाएंगे, पराये भी अपने ही लगने लगेंगे।

दिल सबका दुःखता है, शब्द सबको घायल करते हैं,
कोई रो जाता है सुनकर, किसी की मुस्कान दिखती है।
बेवजह ही ग्रीष्मकाल का अनुभव करना ठीक नही होता,
शांत और शीतल मन ही सुख का आभास कराता है।।

शब्दों का तुम जरा ख्याल रखना, पहले तोलना फिर बोलना,
मुकाम हासिल होगा जरूर तुम्हें, बस अकाश के साथ जमीं का भी ख्याल रखना।

संयम संग मुस्कान की अलग होती है पहचान,
ख्याल रखो अगर सबका, अलग दिखेगी तुम्हारी शान।
तेरा मेरा मत करना, सब दुनिया मे है मायाजाल,
प्रेम ही जीवन प्रेम ही ईश्वर, दुनिया मे बस एक मिशाल।।

शब्दों का चयन करना एक कला है, और इस कला में माहिर हर कोई नहीं,
सोच समझकर उपयोग करना, शब्दों का अपना कोई रोल नहीं।

किस्से कहानियां तो बन ही जाएंगी,
तुम उम्रभर साथ चलने का वादा तो करना।
मेरा हर लम्हा तुम्हारा होगा मेरी शोना,
बस मुझे थोड़ा सा प्यार तुम देना।

न कोई शिकायत बाकी होगी, न ही कोई खफा अब होगा,
चिराग जल उठे अब मोहब्बत में, बस उजाला ही उजाला होगा।

चलो अब ये किस्सा आंखमिचौली का खत्म करते हैं,
तुम दुल्हन बन जाओ और हम बारात लाते हैं।
Pari

© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything....

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