पंछी पिंजरे सा उड़ जाऊंगा
प्रेम है उससे मेरा निश्छल, नहीं कोई उसमें स्वार्थ भरा,
हर सांस है मेरी उसके नाम, कुछ भी नहीं अपने पास धरा।
मेरी परीक्षा वो कभी भी करे, मै हरदम ही रहता तत्पर हूं,
प्रेम में उसके मै डूबा प्रतिपल, उसी के लिए जैसे अब जीता हूं।।
हर रोज उसकी याद है आती, नम आंखे अपनी छिपाता हूं,
जान न सके कोई राज ये मेरा, आंखों में चश्मा लगाता हूं।
मेरे प्रेम की वो परिभाषा, जीवन के मेरे है इक अभिलाषा,
मैं बस उसको देखता हूं, वो पढ़ती है मेरे नयनों की भाषा।।
अनेकों बार समझा चुका हूं, लेकिन वो कहां राजी होती है,
मैं हूं उसके प्रेम में डूबा, वो बस इसे पागलपन बताती है।
मेरी है नादानी या कुछ और, हर पल याद उसकी सताती है,
मैं हूं तनहा आज भी यारो, वो बस ख्वाबों ख्यालों में आती है।।
मेरे प्रेम को आजमा रही, मुझसे खेला वो करने है लगी,
सब कुछ है न्यौछावर उसपर, सबको ढोंग वो बताने लगी।
प्रेम है मेरा उससे अविरल, तन की भूख वो समझने लगी,
दूर जाने पर सोचेगी वो, आज भले नासमझी है करने लगी।।
यादों का पिटारा दे जाऊंगा, झोली में सितारे भर जाऊंगा।
प्रेम करूंगा निश्छल अविरल, काया छूने का प्रयास नहीं करूंगा।
प्रेम परीक्षा है अगर बिछड़न, वो भी हंसकर मैं दे जाऊंगा,
सारी खुशियां भेंट कर उसको, फिर पंछी पिंजरे सा उड़ जाऊंगा।।
Pari ✍️
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