तेरा अधूरा खत आखिरी

आज लिखा था उसे आखिरी पैगाम, और खत के ऊपर उसका नाम,
पहला अक्षर उसके नाम का और दूजे में थी कुशल उसकी।
धीरे धीरे आगे बढ़ते लिखा, सारी गलती मेरी थी, न थी कुछ भी उसकी।
फिर याद आ गया वादा उसका, और फाड़ दिया मैने वह एक पन्ना।।

फिर से शुरू किया दूजे पन्ने में, और पहला अक्षर ही लिखा प्रिये ,
आशा है तुम सकुशल होंगी, घाव ताजे हैं अभी तुमने थे जो दिए।
नाम तुम्हे अभी याद तो होगा, शायद कुछ यादें भी होंगी ताजा,
लेकिन यह खत अंतिम होगा, चाहो तो इक बार मिलने आजा।

थोड़ा फिर रुककर सोचा, अगर गई होगी वो मुझको भूल,
खत फिर वापिस आ जाएगा, चुभेगा ऐसे मुझे जैसे कोई शूल।
मेरी गलती मुझे खलेगी, मैं ही प्यार में था क्या भोला भाला,
वो तो फिर से कह देगी....,देखो छेड़ रहा यह निखट्टू साला।।

कुछ आखर थे लिखे जो मैने, लिख लिखकर के मिटा दिये,
घाव अभी भी थे जो गहरे, खुद ही खुद फिर मैने सिये।
उससे अब क्या इल्म रखूं, खत भी उसके सब जला दिये,
खुद ही खुद में रहता हूं अब, राज वो सारे दिल में कैद किए।।
Pari ✍️ 

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