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तेरा अधूरा खत आखिरी

आज लिखा था उसे आखिरी पैगाम, और खत के ऊपर उसका नाम, पहला अक्षर उसके नाम का और दूजे में थी कुशल उसकी। धीरे धीरे आगे बढ़ते लिखा, सारी गलती मेरी थी, न थी कुछ भी उसकी। फिर याद आ गया वादा उसका, और फाड़ दिया मैने वह एक पन्ना।। फिर से शुरू किया दूजे पन्ने में, और पहला अक्षर ही लिखा प्रिये , आशा है तुम सकुशल होंगी, घाव ताजे हैं अभी तुमने थे जो दिए। नाम तुम्हे अभी याद तो होगा, शायद कुछ यादें भी होंगी ताजा, लेकिन यह खत अंतिम होगा, चाहो तो इक बार मिलने आजा। थोड़ा फिर रुककर सोचा, अगर गई होगी वो मुझको भूल, खत फिर वापिस आ जाएगा, चुभेगा ऐसे मुझे जैसे कोई शूल। मेरी गलती मुझे खलेगी, मैं ही प्यार में था क्या भोला भाला, वो तो फिर से कह देगी....,देखो छेड़ रहा यह निखट्टू साला।। कुछ आखर थे लिखे जो मैने, लिख लिखकर के मिटा दिये, घाव अभी भी थे जो गहरे, खुद ही खुद फिर मैने सिये। उससे अब क्या इल्म रखूं, खत भी उसके सब जला दिये, खुद ही खुद में रहता हूं अब, राज वो सारे दिल में कैद किए।। Pari ✍️ 

कुछ फैसले जो गलत किये शायद हमने..!

भारी मन से निकले हम, छोड़कर अपना घर कुछ बेड़ियां तो तोड़कर कुछ रिश्तों को पीछे छोड़कर वो लड़कपन की बात, वो सावन की बरसात, कुछ जिंदगी को भूल निकल आए हम तेरे शहर। ख्वाहिशें अनेक लिए, पैरों को ज़मीं पर धरे निकल आए हम स्वर्ग छोड़कर तेरे बेजान शहर वो खुशबू पहाड़ की, महक वो गांव में हवा की,  वो पहाड़ वो नदियां और मोहब्बत किसी की। वो गले लगती राहें, वो खुशी में खुली उसकी बाहें, वो सरसराती हवा ठंडी, वो प्रेमी से बिछड़न की आहें। छोड़कर निकले हम वो सुहाने दिन और वो ख़ामोश रात, सोचकर निकले उस दिन, कि पा जायेंगे एक दिन कायनात।। शहरों की खाक छानी, बन गया अपना खून भी पानी, बुढ़ापा साथ लिए जा रहे, छोड़ कहीं वो अपनी जवानी। न ख्वाब ही पूरे हुए कोई, न मिल सकी वो सपनो की रानी, बस समय कटता गया, और लूट गई अपनी सारी रवानी।। अब सोचकर वो दिन, बस खामोश बैठ जाता हूं, निकले थे जो कदम उस दिन, न रोक पाने की कीमत चुकाता हूं। अब तो बस आसमा को देख पुरानी यादों को जी रहा हूँ, जो घाव दिए जिंदगी ने, उन्हीं के आंसू पीए जा रहा हूँ।। Pari ✍️