Pari की कल्पना "परिकल्पना"

मैं लिखू जो कुछ तो तुम उसे सिर्फ तारीफ न समझना,
दिल की बात होठों से कहो, यूँ बस आहें न भरना।

थोड़ी देर से भले लेकिन मुलाकात तो होगी ही जनाब,
पूरा न हो ऐसा दुनिया में, होता नहीं है कोई ख्वाब।

न कोई किस्सा था न ही कोई कहानी थी,
मोहब्बत तो होनी ही थी, छायी जो जवानी थी।

सर्द हवाओं के मौसम संग लाये मोहब्बत की गर्माहट,
लौट आये हम पास तुम्हारे, अब गले लगा लो हमें फटाफट।

दिल से सोची हुयी हर मुराद कुदरत अक्सर निभाती है,
सच्चे दिल से हो अगर मोहब्बत तो मुलकात भी हो ही जाती है।

किया था बयाँ शब्दो में, तेरी यादों और तेरी कमी दोनो को,
कुछ समझे और चुप रह गए, बाकी तारीफ में वाह वाह कर गए।।

यूहीं नहीं है तनहा हम, तेरा इंतजार आज भी है,
तू कहां कैसी है खबर न सही, तेरा ख्याल तो आज भी है।

दिल में मलाल आज भी है, तेरा ख्याल आज भी है,
वादा था तुझसे मिलने का, वो सवाल आज भी है।
भूल जाएं तुम्हे हम, या फिर अभी और इंतज़ार किया जाए,
तुम ही बताओ "Pari" आगे और क्या किया जाए।
Pari ✍️ 



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