तेरी यादों की बारात रुक गई
कुछ सुकूँ तो दिल को जरूर मिल गया है,
तेरी मुस्कान का दीदार जो हो गया है।
वर्षों से प्यासी थी जो आँखे एक झलक को,
जैसे आज कोई अमृत रस पान हो गया है।।
क्या कहूँ तुझे कैसा ये इंतज़ार था मेरा,
बिन तेरे जैसे हर तरफ बस था अँधेरा।
हर आस भी अब दम तोड़ने को थी जैसे,
आने से तेरे एक जीवन प्राण मिला इसे।
अगर होती कोई तपस्या तेरे मिलन को,
हंस कर वर्षों किया करते हम भी तेरे लिए।
दुवाओं के सिवा कोई विकल्प न था पास यारा,
बस ताउम्र बस एक वही तो करते रहे।
साथ जो छूट गया एक बार, फिर कहां मुलाकात होती है,
दूर जाने के बाद तो बस, अपनी भी जैसे परायी होती है।
आखिरी मुलाकात से लेकर आखिरी झुकी निगाहें तेरी।
फिर सारे गम मेरे हो गए और खुशियां तमाम हो गई तेरी।।
चल अब वादा कर की भूल जाएंगे हम एक दूजे को,
अगर हुई मुलाकात तो समझेंगे अजनबी हम दोनों को।
सारी यादों मुलाकातों को बस सीने में छुपाकर रखेंगे,
सिले होंठों के साथ ही दुनियां को अलविदा हम कहेंगे।।
Pari ✍️
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