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तुमसे है जिंदगी

 माना कि भावनाओं में बहना ठीक नहीं, लेकिन बिना इनके जीना भी मुमकिन नही। सोचा तो अक्सर मैं भी करता हूँ इस बारे में, कि न लिखूँ कभी भावनाओं को सामने रख के।। मैंने भी की मोहब्बत बेइंतहा किसी एक से, कद्र उसी को सबसे कम हुयी मेरे प्रेम से। सब कुछ नजरअंदाज कर जिसे लगाया गले से, वही बांह निकली मेरे लिये कमजोर सबसे।। राहत की चाहत में आँख बंद कर भरोसा कर लिया, मैंने तो ताउम्र का जैसे सुख एक साथ पा लिया। अकाबक्की में फैसले कर लेता तो ठीक था शायद, सोच समझकर जैसे मैंने कुछ पाकर भी खो लिया।। मैं तो बस करता रहूँगा तुमसे वफ़ा एकतरफा ही सही, सितम भी बिना उफ सह लूँगा मैं बेवजह ही। मेरी हर प्रार्थना में तेरी ख़ुशी ही बरकरार रहेगी, तू मुस्कुरा ले बस चाहे कीमत मेरी जान भी होगी। ©®pari

बेजान हूँ तुम बिन

बामुश्किल से मुस्कुराने की कोशिश करता हूँ, कुछ पलों के लिये खुश होने की कोशिश करता हूँ। आता है वही दौर अश्रुओं का फिर लौटकर, दिलाने मुझे मेरी किश्मत का गम याद फिर से। कोशिश तो बहुत की हर किसी का खास होने की, दबाकर हर गम अपना साथ सबके मुस्कुराने की। लेकिन मैं भी लड़ता कब तक अपने नसीब से, मांगकर जो लाया था ज़िन्दगी सिर्फ रुलाने की।। सब रिस्तों को मैं अकेला तवज्जो देता रहा बस, सबके होठों पर मुस्कुराहट लाने को लड़ता रहा बस। मेरा अपना वजूद मिट गया, मैं बिसरा सा दिया गया, जैसे मूरत हूँ मैं भी कोई बनी पुराने पाषाण की।। मेरा गर्व मेरा अहम था जो वो भी रुठ गया, मेरी मुस्कुराहट ही मुझे आँशु थमा गयी अब तो, अब तो बिन एहसास जैसे बेजान हो गया हूँ, जान है शरीर में लेकिन भावनाओं से बेजान हूँ।। Pari

मेरी मुस्कान मेरी पहचान

क्या करें क्या न करें, क्यों ऐसी स्थिति पैदा हुयी है, अधिकारों का उपयोग जो, सही से नही किया है। देखभाल कर भी तुमने गलत निर्णय जो लिया था, दोष अब देना क्यों, खुद गलत व्यक्ति तुमने चुना था।। जात पात की होड़ में, काबिल को तुमने चुका दिया, अहम अपना आज दिखाने को, कल तुमने ठुकरा दिया। पाछ पछताये निरर्थक है, समय से जो जागे नहीं, निश्चित है आज हार तुम्हारी, समय पर जो भागे नहीं।। अवसर का क्या है वो तो, आकर फिर चला जायेगा, आँख मूंद जो बैठे तो, क्या समय वहीं ठहर जायेगा। रात के बाद सवेरा है लेकिन, उसपर सबका अधिकार नहीं, वैसे ही धोखेबाजों को, जग में मिलता फिर सहर नहीं।। मैं तो आज यहाँ हूँ लेकिन, फिर कल कोई और होगा, मेरे जैसी सोच फिर होगी, इसपर तो बस संशयः होगा। मेरी मुस्कान कोई व्यंग्य नहीं, लेकिन कुछ को चिढ़ाती है, लाख षड्यंत्रों के बाद भी, मेरी होंठों से ये नहीँ जाती है।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

देवभूमी से प्रेम अतुल्य

 देवभूमी के वासी हम, देवभूमी में रहते हैं, सीमित साधनों में भी जीवन जी लेते हैं। दुनिया की दौड़ धूप से दूर यहाँ, भोजन में कन्द मूल भी चख लेते हैं। साहस अतुल्य है जन जन में, चुटकी में नदी पहाड़ चढ़ लेते हैं। रिस्तों की कद्र हैं करते हम सब, प्रेम में जीवन तक अर्पण कर देते हैं... खुश्बू अलग है इस माटी की, देशप्रेम कण कण में बसता है। कहने की जरूरत नहीं पड़ती, हर दूसरा लाल देश पे मरता है।। अक्सर मुझसे यार मेरे पूछ लेते हैं, देवभूमी की चाहत क्यों है कहते हैं। मैं तो बस इतना सा कह सकता हूँ, देवभूमी में ही तो जीवन को मैं पाता हूँ।। Pari

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

खुली हवा हो जहाँ, बंदिशों की घुटन न महसूस हो, ज़िम्मेदारी को समझ जहाँ, राष्ट्र हित ही सर्वोपरि हो। जात, धर्म, समुदाय, स्त्री-पुरुष से बढ़कर जहाँ इंसानियत हो, भूखा जागे जहाँ कोई भी मगर, नींद से पहले खाली पेट न हो।। मेरा तेरा से बढ़कर जहाँ, हमारा पर सबका विश्वास हो, न द्वेष हो, न ईर्ष्या का भाव हो, न अहंकार का वास हो। प्राणियों में ईश्वर न सही, लेकिन इंसानियत अवश्य हो, वसुधैव कुटुम्बकम और अतिथिदेवो भव का प्रयास हो।। मेरा ऐसा स्वतंत्रता के प्रति अभिप्राय हो....जय हिन्द Pradeep Kumar

हम सब के आदर्श, जय श्री राम

राम नाम का नारा गाकर, राममयी हो जाना है, भव्य मन्दिर बना जहाँ में, एक संदेश पहुचाना है एक कदम आज बढ़ा दिया, पूजन भूमि कराया है, श्रद्धा पुष्प चढ़ाकर हमने, राममयी हो जाना है।। मन प्रफुल्लित हो चला आज, सालों का था इंतज़ार, अनेक रूकावटें आयी माना, लेकिन सपना हुआ साकार। आँखों मे तस्वीर दिख रही, तन मन मे बज रही राम धुन, जयकारा लग रहा चहुँ ओर, जय राम श्री राम जय जय राम।। अनेक कोशिशें कर गये दानव, अस्तित्व राम का मिटाने को, मिट्टी में मिल गये स्वयं वो, आये थे हमें सबक सिखाने को। सेक्युलर का स्वांग रचाकर, संस्कृति मिटाने चले थे हमारी, हर बार मुहँ की खाने को मिली, इस राक्षसों को बारी बारी।। ताड़का हो गया खर-दूषण, आयें चाहे सूर्पणखा, यमपुरी को भेजे रामजी ने, मेघनाद से रावण तक। कलयुग के कुछ राक्षसों की, बारी अब शायद आयी है, इसीलिये तो शायद इन दुष्टों ने, टाँग अपनी ऐसे अड़ायी है। अनेकों सकुनी आ जायें अब, भले हो जाये लाख षड्यन्त्र, रामजन्मभूमि पर बनाने मन्दिर, हर भक्त हो चल अब स्वतंत्र। राम नाम के जयघोष लगेंगे, गूजेंगे नारे अब चहुँ ओर, राम नाम से ही होगी अब तो, हर देशवासी की नव भोर।। मानवता का पाठ है रा...

मेरी पसंद मेरा गाँव

लौट आया हूँ जो घर को अपने, बड़ा सुकूँ महसूस करता हूँ, जिस माटी में जन्म लिया, आज उसी में बैठ जब खाता हूँ। देख निराली छटा देवभूमी की, मैं पुलकित हो उठता है, खेलना, बोलना, चलना सीखा, जहाँ जन्म मैं पाया हूँ। शुद्ध हवा और ताजा पानी, चौमास की वो हरियाली, फ्यूंली-बुराँश और फूल बुग्याल, खिल्या मेलु की खुश्बू निराली। आरू, खुबानी, माल्टा नारंगी, तिमला, काफल की गज्ज डाली, सौंण भादो की बरखा रुमझुम, डान्ड्यू लॉकदी वा कुयेडी। दादा दादी का प्यार दुलार, माँ पापा की झूठी फटकार, कहने को सब था शहर में, बस इसी की थी दरकार। न अपनापन मिला कभी, न अपनों का साथ शहर में, हो सके तो तुम भी लौटो, जीवन ढूंढ़ो अपनी जड़ों में।। राह कठिन है अब माना, लेकिन संभव है कर पाना, थोड़ी मेहनत जरूर है लेकिन, आजादी को खुलकर जीना। परी कलम बस इतना कहती, नहीं शहर अब है मुझको रहना, जीवन का मर्म है खुशी, जिसे मैंने बस गाँव मे है जाना।। pari Love is life......Love is god....Love is everything