मेरी मुस्कान मेरी पहचान
क्या करें क्या न करें, क्यों ऐसी स्थिति पैदा हुयी है,
अधिकारों का उपयोग जो, सही से नही किया है।
देखभाल कर भी तुमने गलत निर्णय जो लिया था,
दोष अब देना क्यों, खुद गलत व्यक्ति तुमने चुना था।।
जात पात की होड़ में, काबिल को तुमने चुका दिया,
अहम अपना आज दिखाने को, कल तुमने ठुकरा दिया।
पाछ पछताये निरर्थक है, समय से जो जागे नहीं,
निश्चित है आज हार तुम्हारी, समय पर जो भागे नहीं।।
अवसर का क्या है वो तो, आकर फिर चला जायेगा,
आँख मूंद जो बैठे तो, क्या समय वहीं ठहर जायेगा।
रात के बाद सवेरा है लेकिन, उसपर सबका अधिकार नहीं,
वैसे ही धोखेबाजों को, जग में मिलता फिर सहर नहीं।।
मैं तो आज यहाँ हूँ लेकिन, फिर कल कोई और होगा,
मेरे जैसी सोच फिर होगी, इसपर तो बस संशयः होगा।
मेरी मुस्कान कोई व्यंग्य नहीं, लेकिन कुछ को चिढ़ाती है,
लाख षड्यंत्रों के बाद भी, मेरी होंठों से ये नहीँ जाती है।।
Pari
Love is life......Love is god....Love is everything
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