तुमसे है जिंदगी

 माना कि भावनाओं में बहना ठीक नहीं,

लेकिन बिना इनके जीना भी मुमकिन नही।

सोचा तो अक्सर मैं भी करता हूँ इस बारे में,

कि न लिखूँ कभी भावनाओं को सामने रख के।।


मैंने भी की मोहब्बत बेइंतहा किसी एक से,

कद्र उसी को सबसे कम हुयी मेरे प्रेम से।

सब कुछ नजरअंदाज कर जिसे लगाया गले से,

वही बांह निकली मेरे लिये कमजोर सबसे।।


राहत की चाहत में आँख बंद कर भरोसा कर लिया,

मैंने तो ताउम्र का जैसे सुख एक साथ पा लिया।

अकाबक्की में फैसले कर लेता तो ठीक था शायद,

सोच समझकर जैसे मैंने कुछ पाकर भी खो लिया।।


मैं तो बस करता रहूँगा तुमसे वफ़ा एकतरफा ही सही,

सितम भी बिना उफ सह लूँगा मैं बेवजह ही।

मेरी हर प्रार्थना में तेरी ख़ुशी ही बरकरार रहेगी,

तू मुस्कुरा ले बस चाहे कीमत मेरी जान भी होगी।

©®pari

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