मेरी पसंद मेरा गाँव
लौट आया हूँ जो घर को अपने, बड़ा सुकूँ महसूस करता हूँ,
जिस माटी में जन्म लिया, आज उसी में बैठ जब खाता हूँ।
देख निराली छटा देवभूमी की, मैं पुलकित हो उठता है,
खेलना, बोलना, चलना सीखा, जहाँ जन्म मैं पाया हूँ।
शुद्ध हवा और ताजा पानी, चौमास की वो हरियाली,
फ्यूंली-बुराँश और फूल बुग्याल, खिल्या मेलु की खुश्बू निराली।
आरू, खुबानी, माल्टा नारंगी, तिमला, काफल की गज्ज डाली,
सौंण भादो की बरखा रुमझुम, डान्ड्यू लॉकदी वा कुयेडी।
दादा दादी का प्यार दुलार, माँ पापा की झूठी फटकार,
कहने को सब था शहर में, बस इसी की थी दरकार।
न अपनापन मिला कभी, न अपनों का साथ शहर में,
हो सके तो तुम भी लौटो, जीवन ढूंढ़ो अपनी जड़ों में।।
राह कठिन है अब माना, लेकिन संभव है कर पाना,
थोड़ी मेहनत जरूर है लेकिन, आजादी को खुलकर जीना।
परी कलम बस इतना कहती, नहीं शहर अब है मुझको रहना,
जीवन का मर्म है खुशी, जिसे मैंने बस गाँव मे है जाना।।
pari
Love is life......Love is god....Love is everything
जिस माटी में जन्म लिया, आज उसी में बैठ जब खाता हूँ।
देख निराली छटा देवभूमी की, मैं पुलकित हो उठता है,
खेलना, बोलना, चलना सीखा, जहाँ जन्म मैं पाया हूँ।
शुद्ध हवा और ताजा पानी, चौमास की वो हरियाली,
फ्यूंली-बुराँश और फूल बुग्याल, खिल्या मेलु की खुश्बू निराली।
आरू, खुबानी, माल्टा नारंगी, तिमला, काफल की गज्ज डाली,
सौंण भादो की बरखा रुमझुम, डान्ड्यू लॉकदी वा कुयेडी।
दादा दादी का प्यार दुलार, माँ पापा की झूठी फटकार,
कहने को सब था शहर में, बस इसी की थी दरकार।
न अपनापन मिला कभी, न अपनों का साथ शहर में,
हो सके तो तुम भी लौटो, जीवन ढूंढ़ो अपनी जड़ों में।।
राह कठिन है अब माना, लेकिन संभव है कर पाना,
थोड़ी मेहनत जरूर है लेकिन, आजादी को खुलकर जीना।
परी कलम बस इतना कहती, नहीं शहर अब है मुझको रहना,
जीवन का मर्म है खुशी, जिसे मैंने बस गाँव मे है जाना।।
pari
Love is life......Love is god....Love is everything
Comments
Post a Comment