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तुझसे मुलाकात एक बार फिर

न जाने क्यूँ लेकिन हाँ मुझे याद है, संग तेरे बिताया हर पल हर लम्हा याद है.. पहले भी हुयीं हैं मुलाकातें तुमसे बहुत माना, न जाने फिर इस मुलाकात की बात अलग क्यूँ है? इस तरह से तुम मुझसे मिलोगे मुझे यकीं न था, खुद सालों की पलभर में मिटाओगे सोचा न था। वो तेरा झुकीं नजरों से मुस्कुरा के देखना फिर से.. यूँ बाहों में तुम समां जाओगे कभी सोचा न था..।। पलभर को लगा जैसे कोई सपना साकार हुआ है, वर्षों से थी जो आस, जैसे उसे आज किनारा मिला है। क्या कहुँ तुझसे उन लम्हों में क्या बात थी.. लगा सालों बाद जैसे आज चाँदनी कोई रात थी।। तेरे संग में बिताये वो पल बेहद कीमती हो गए, तेरे अधरों के शब्दों से, जैसे लाखों फूल खिल गए। यूँ तो मेरा कोई वजूद नहीँ है जहां में यकीनन.. लेकिन तेरे होने से लगा हम भी कुछ कीमती हो गए..! एक एक बात तेरी मुझे याद आ जाती है, जिक्र जब दिल मे तेरे होने का साथ कहीं आता है। सोचता हूँ कि तेरा शुक्रिया भी करूँ कभी मैं, लेकिन मोहब्बत इसकी इजाजत नहीं देती है। न कोई ख्वाईश ही है, न कोई अरमा है तुझसे। जब भी दिल बेचैन रहे, बस एक मुलाकात हो तुझसे, वादा है मेरी मौजूदगी तुझे कभी खलेगी नहीँ, पान...

राधे कृष्ण नाम जपो

कृष्णा कृष्णा कहते जाओ मन का मैल धोते जाओ, सारे काम बन जायेंगे कृष्णा तेरे पास आएंगे। मन में कोई बैर न रखना मानवता के बन्दों से, कृष्णा कृष्णा कहते रहना आते जाते भक्तो से।। मैं भी तेरे चरणों में नमन सदा ही करता हूं, दिन के चारो पहर राधे कृष्णा जापता हूं। दिल के मेरे सुकुन तब भी आता है, राधे कृष्णा मेरा तन मन जब गाता है। सुन्दर सलोना जिनका मुख मंडल मुस्काता है, कृष्णा मेरा राधा संग बहुत ही सुहाना लगता है। कर लो तुम भी मन से कृष्णा राधा का गुणगान, जन्म सफल होगा मुक्ति मिलेगा बैकुंठ धाम।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

सुबह होती है निशा के बाद ही

मेरा गर्व था तू, मेरी उम्मीद के पीछे की हिम्मत था तू। जब जब मैं हुआ भ्रमित, मेरी डूबती नाव का सहारा था तू.. मैं रहूं खामोश, मेरी खामोशियों का जवाब था तू! चाहे कुछ भी कहो तुम आज, मेरी ज्यू जान था तू।। राहत मिलती थी मुझे, वो जी का सुकूँ था तू, रात के घने अँधेरे में भी, उजाले की किरण था तू। बेशक भटक जाता कहीं राहों में मैं भी अक्सर ही, मेरी हर राह पर जैसे दिशासूचक था तू।। टूट चुका है गुरुर मेरा, तूने जो दिखायी मुझे मेरी औकात है, मैंने तो माना था बस तुझे ही ज़िन्दगी अपनी। लेकिन मैं तो बस तेरे लिये एक खिलौना भर था। चलो देर से ही सही, भृम और गुरुर टूटा तो सही..! यही बस जीवन की एक सच्चाई है, सिवा अपने सारा जग बस पराया है। कर खुदपर भरोसा और जुट जाओ शिद्दत से, फिर न कोई गम होगा, जहां फिर तेरे कदमो में होगा.. Pari ✍️

बस कुछ ख्यालों में

जिंदगी अब सस्ती हो गयी, चंद पैसों में बिकती है। इंसानियत बस अब किताबों में है, और किताबें अब सड़को में दिखती हैं.. सुकूँ की खोज न कर इस जहाँ में अब, सुकूँ खोजते खोजते चैन भी खो जाएगा।। ज़माना बदल चुका है, अब हालात बदलने बाकी है, दिल की बात न कर अब, बस कुछ जज्बात बदलने बाकी हैं ज़िन्दगी एक जंग है, और हम सिपाही भर, मरना है अंत जानते हैं, फिर भी लड़ रहे मुस्कुराकर...👆🏻 आया फिर बसंत पर्वतों में, खिल गये फूल पेड़ो में, चहुँ ओर हरियाली आयी, आया मौल्यार चेहरों में। मैं भी हूँ का बार सालों बाद, मनाने घर होली का त्योहार, तो फिर हो जाओ तैयार, मनाएंगे होली सब अबकी बार।। मैंने जो लिखे तो कुछ शब्द कविता बन गए, तुमसे बिछड़ने का जैसे सबब बन गये। यकीकन तुम आज दूर हो मुझसे यारा, आज ये शब्द ही तेरे होने का एहसास बन गये...!! Pari✍️

यादों की वो बात

 कैसे भूल जाऊँ वो बचपन मे बिताये दिन, वो पीपल की छांव थी वो बाबा जी का डर। अक्सर ही तो तेरी याद आती है यहाँ मुझको, आँखें होती है नम सोच बात उन दिनों की फिर.. वो बालपन था मेरा वो घुटनों के बल चलना वो मिट्ठी में गिरना और फिर वो मिट्टी को ही चरना। मिट्टी में लतपत वो चेहरे का हो जाना, वो मासूमियत से फिर माँ की राह को तकना... दिन फिर बीते कुछ और बचपन के, घुटनों को छोड़ शुरू फिर किया चलना पैरो से। कभी खायी चोटें गिर उठकर लड़कपन में, वो दादी के दुलार में दादा जी के लाड में.. बिताये दिन फिर वहीं गांव की पाठशाला में, वो मौज थी यारो संग कभी मास्टर जी की डांट में। चुराये आम तो कभी सेब लड़कपन में बागों से, न जाने स्वाद कैसा था अपने छोड़ पराये खेतों मे। अब तो बस याद बाकी है सब जैसे कोई सपना हो, नींद में थे गहरी किसी ने आज नींद से जैसे जगाया हो यादों में ही बस अब तो वो पेड़ों की छाँव गांव की, वो कच्चे रास्ते ..वो खिलखिलाता आंगन गांव का। Pari✍️

गौं गुठयार खाल धार

पुंगड़ी अपड़ी बांजा छोड़ि, मोल कु क्वादो लाणा छिन, आँखा बूजी की सियाँ भितरी, धुरपली मा बन्दर नचणा छिन। डाली बोटी सुखी गैनी आस मा, अब दुकानी सारा बैठ्या छिन, पन्देरा सुखी बाटो जूँकु देखी, वो नलखों मा पाणी खुजयाणा छिन।। न कौथिग गैनी न जलेबी खैनी, आज वो दिन खुजयाणा छिन, न रामलीला देखी न देवता नचै, अब धारुं मा भूत पूजण छिन। न गोर चरैनी न कभी धै लगैनी, आज द्वी बात सुनण कु तरसणा छिन। खैरी नि खायी पिड़ा नि साई, आज एक गालु भी नि उघड़ सकणा छिन। ख्यालूँ म च गौं गाण्यूं म छन लोग, घौर बस अब यादु म च, आस भर मा छन अपड़ा, बिरणों से क्या आस लगाण तब। जब खलयाँण ही खाली छन, फिर थैला का सारा क्या कन, समय फर बिजी जाओ त ठीक, पाछ उठी फिर कुछ नि मिन.. Pari

प्रेम एक पूर्णविराम..!

कैसी भी हो बात दिल की, थोड़ी तो छुपा लेनी चाहिये, सोच समझकर ही किताब दिल की अपनी खोलनी चाहिये। यूहीं आँख मूँदकर नहीं करते भरोसा हर किसी पर, जज्बातों की दुकान हर किसी के आगे खोलनी नहीं चाहिये। सालों बीत जाते हैं जहाँ में, एक नायाब दोस्त खोजने में, लेकिन एक पल नहीं लगता, वो नायाब हीरा खो देने में। मुफ्त में मिल जाती है सलाह हर ओर से तुमको यकीनन, लेकिन भरोसा नहीं मिलता कभी भी लाखों लुटाने में..।। एक उम्मीद हमने भी की थी कि जवाब में प्रेम मिलेगा, जैसा हमने चाहा है उसे वैसे ही वो भी दिल खोल देगा। नहीं था हमें मालूम कि हर चाह पूरी नहीं होती जहां में, ख्वाइशें नहीं मुकम्मल होती हर किसी की जहां में.. चलो अब हम भी अपना दिल कैद पिंजरे में कर लेते हैं छोड़कर राहें प्रेम की हकीकत के जहां में जी लेते हैं। प्रार्थनाओं में खुशियाँ मांग लेंगे उनकी ईश्वर से हम भी। साँस थमने तक उसका नाम नहीं लेंगे अब हम भी... कर लिया है खुद से वादा, कि अब एक नई डगर खोजेंगे, राह अब दोबारा मोहब्बत की, हम अब नहीं नापेंगे। बहुदा प्रेम पा लिया तुमने, pari इस जन्म में, छोडकर ये डगर अब हम, प्रेम पर पूर्णविराम लगायेंगे..।। pari✍️