सुबह होती है निशा के बाद ही
मेरा गर्व था तू, मेरी उम्मीद के पीछे की हिम्मत था तू।
जब जब मैं हुआ भ्रमित, मेरी डूबती नाव का सहारा था तू..
मैं रहूं खामोश, मेरी खामोशियों का जवाब था तू!
चाहे कुछ भी कहो तुम आज, मेरी ज्यू जान था तू।।
राहत मिलती थी मुझे, वो जी का सुकूँ था तू,
रात के घने अँधेरे में भी, उजाले की किरण था तू।
बेशक भटक जाता कहीं राहों में मैं भी अक्सर ही,
मेरी हर राह पर जैसे दिशासूचक था तू।।
टूट चुका है गुरुर मेरा, तूने जो दिखायी मुझे मेरी औकात है,
मैंने तो माना था बस तुझे ही ज़िन्दगी अपनी।
लेकिन मैं तो बस तेरे लिये एक खिलौना भर था।
चलो देर से ही सही, भृम और गुरुर टूटा तो सही..!
यही बस जीवन की एक सच्चाई है,
सिवा अपने सारा जग बस पराया है।
कर खुदपर भरोसा और जुट जाओ शिद्दत से,
फिर न कोई गम होगा, जहां फिर तेरे कदमो में होगा..
Pari ✍️
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