प्रेम एक पूर्णविराम..!
कैसी भी हो बात दिल की, थोड़ी तो छुपा लेनी चाहिये,
सोच समझकर ही किताब दिल की अपनी खोलनी चाहिये।
यूहीं आँख मूँदकर नहीं करते भरोसा हर किसी पर,
जज्बातों की दुकान हर किसी के आगे खोलनी नहीं चाहिये।
सालों बीत जाते हैं जहाँ में, एक नायाब दोस्त खोजने में,
लेकिन एक पल नहीं लगता, वो नायाब हीरा खो देने में।
मुफ्त में मिल जाती है सलाह हर ओर से तुमको यकीनन,
लेकिन भरोसा नहीं मिलता कभी भी लाखों लुटाने में..।।
एक उम्मीद हमने भी की थी कि जवाब में प्रेम मिलेगा,
जैसा हमने चाहा है उसे वैसे ही वो भी दिल खोल देगा।
नहीं था हमें मालूम कि हर चाह पूरी नहीं होती जहां में,
ख्वाइशें नहीं मुकम्मल होती हर किसी की जहां में..
चलो अब हम भी अपना दिल कैद पिंजरे में कर लेते हैं
छोड़कर राहें प्रेम की हकीकत के जहां में जी लेते हैं।
प्रार्थनाओं में खुशियाँ मांग लेंगे उनकी ईश्वर से हम भी।
साँस थमने तक उसका नाम नहीं लेंगे अब हम भी...
कर लिया है खुद से वादा, कि अब एक नई डगर खोजेंगे,
राह अब दोबारा मोहब्बत की, हम अब नहीं नापेंगे।
बहुदा प्रेम पा लिया तुमने, pari इस जन्म में,
छोडकर ये डगर अब हम, प्रेम पर पूर्णविराम लगायेंगे..।।
pari✍️
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