बस कुछ ख्यालों में

जिंदगी अब सस्ती हो गयी, चंद पैसों में बिकती है।

इंसानियत बस अब किताबों में है,

और किताबें अब सड़को में दिखती हैं..


सुकूँ की खोज न कर इस जहाँ में अब,

सुकूँ खोजते खोजते चैन भी खो जाएगा।।


ज़माना बदल चुका है, अब हालात बदलने बाकी है,

दिल की बात न कर अब, बस कुछ जज्बात बदलने बाकी हैं


ज़िन्दगी एक जंग है, और हम सिपाही भर,

मरना है अंत जानते हैं, फिर भी लड़ रहे मुस्कुराकर...👆🏻


आया फिर बसंत पर्वतों में, खिल गये फूल पेड़ो में,

चहुँ ओर हरियाली आयी, आया मौल्यार चेहरों में।

मैं भी हूँ का बार सालों बाद, मनाने घर होली का त्योहार,

तो फिर हो जाओ तैयार, मनाएंगे होली सब अबकी बार।।

मैंने जो लिखे तो कुछ शब्द कविता बन गए,

तुमसे बिछड़ने का जैसे सबब बन गये।

यकीकन तुम आज दूर हो मुझसे यारा,

आज ये शब्द ही तेरे होने का एहसास बन गये...!!

Pari✍️

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