तुझसे मुलाकात एक बार फिर
न जाने क्यूँ लेकिन हाँ मुझे याद है,
संग तेरे बिताया हर पल हर लम्हा याद है..
पहले भी हुयीं हैं मुलाकातें तुमसे बहुत माना,
न जाने फिर इस मुलाकात की बात अलग क्यूँ है?
इस तरह से तुम मुझसे मिलोगे मुझे यकीं न था,
खुद सालों की पलभर में मिटाओगे सोचा न था।
वो तेरा झुकीं नजरों से मुस्कुरा के देखना फिर से..
यूँ बाहों में तुम समां जाओगे कभी सोचा न था..।।
पलभर को लगा जैसे कोई सपना साकार हुआ है,
वर्षों से थी जो आस, जैसे उसे आज किनारा मिला है।
क्या कहुँ तुझसे उन लम्हों में क्या बात थी..
लगा सालों बाद जैसे आज चाँदनी कोई रात थी।।
तेरे संग में बिताये वो पल बेहद कीमती हो गए,
तेरे अधरों के शब्दों से, जैसे लाखों फूल खिल गए।
यूँ तो मेरा कोई वजूद नहीँ है जहां में यकीनन..
लेकिन तेरे होने से लगा हम भी कुछ कीमती हो गए..!
एक एक बात तेरी मुझे याद आ जाती है,
जिक्र जब दिल मे तेरे होने का साथ कहीं आता है।
सोचता हूँ कि तेरा शुक्रिया भी करूँ कभी मैं,
लेकिन मोहब्बत इसकी इजाजत नहीं देती है।
न कोई ख्वाईश ही है, न कोई अरमा है तुझसे।
जब भी दिल बेचैन रहे, बस एक मुलाकात हो तुझसे,
वादा है मेरी मौजूदगी तुझे कभी खलेगी नहीँ,
पानी में नमक सा कभी जहां को दिखेगी नहीं..
मन तो है कि लिखूं अनेकों शब्द तुझपर आज फिर,
लेकिन भावनाओं में बहना अच्छा नहीं आज फिर।
फिर भी पिरोये हैं कुछ शब्द कविता में आज फिर।
इसी विश्वास में कि मुलाकात होगी तुझसे जल्दी फिर।।।
Pari✍️
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